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चुनाव 2019: उत्तराखंड बसपा में नए चेहरे की एंट्री, ऐन मौके पर प्रत्याशी बदलकर कारोबारी पर लगाया दांव

Fri, 22 Mar 2019 11:10 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुद्रपुर
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बसपा प्रत्याशी नवनीत - फोटो : फाइल फोटो
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उत्तराखंड में सपा के साथ महागठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ रही बसपा ने नैनीताल लोकसभा सीट पर ऐन वक्त पर प्रत्याशी में बदलाव कर दिया है। घोषित प्रत्याशी राजेश दूबे का टिकट काटकर बरेली निवासी रियल स्टेट और होटल कारोबारी नवनीत अग्रवाल को प्रत्याशी बनाते हुए बिना लावलश्कर के नामांकन भी दाखिल करवा दिया है। नैनीताल लोकसभा में नए चेहरे नवनीत बरेली की सियासत में सक्रिय होने के साथ ही बसपा की बरेली मंडल में वैश्य भाईचारा कमेटी के मंडल कोऑर्डिनेटर हैं। 

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बसपा की राजनीति में प्रत्याशी में बदलाव कोई नया नहीं है लेकिन नैनीताल लोकसभा में अचानक हुए प्रत्याशी बदलाव को माना जा रहा है कि बसपा इस सीट को लेकर बेहद संजीदा है। हालांकि सवाल खड़ा हो रहा है कि पार्टी ने राजेश को प्रत्याशी बनाने से पहले पार्टी ने उनके अतीत पर रोशनी डालने की जहमत क्यों नहीं उठाई। 

दरअसल कुछ समय पहले बसपा में शामिल हुए रुद्रपुर के भगवानपुर के रहने वाले राजेश दूबे को पार्टी ने लोकसभा कोऑर्डिनेटर बनाने के बाद प्रत्याशी घोषित किया था। राजेश के आवास पर पार्टी के प्रदेश प्रभारी सहित तमाम नेताओं ने बैठक कर चुनाव को लेकर रणनीति भी तय की थी। गठबंधन के फार्मूले पर चुनाव लड़ रही बसपा ने आनन-फानन में आपराधिक इतिहास का हवाला देकर राजेश का टिकट काटकर नवनीत को प्रत्याशी बना दिया।

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प्रदेश में बसपा की राजनीति के नए चेहरे नवनीत बरेली में पार्टी में सक्रिय हैं। वर्ष 2017 में बरेली में आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ने वाले और रियल स्टेट और होटल कारोबारी नवनीत बीते साल ही बसपा में शामिल हुए थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें वैश्य कमेटी का मंडल कोऑर्डिनेटर बनाया था। 

आईआईटी रुड़की से बीई और आईआईएम कोलकाता से ईपीबीएम कर चुके नवनीत का बरेली से सीधा नैनीताल लोकसभा की राजनीति में बसपा ने पदार्पण किया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी के पास फिलहाल कद्दावर चेहरा लोकसभा चुनाव लड़ने को नहीं था और प्रत्याशी बदलना भी मजबूरी थी।

लिहाजा पार्टी ने नैनीताल और उत्तराखंड के बजाए यूपी के बरेली से प्रत्याशी लाना मुनासिब समझा। अब देखना होगा कि नवनीत पर दांव खेलना गठबंधन के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा। इधर राजेश दूबे से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
 
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विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशी बदल चुकी बसपा
यूपी में बसपा की सियासत में प्रत्याशी घोषित होने के बाद ऐन वक्त पर टिकट कटना कोई नई बात नहीं है लेकिन नैनीताल लोकसभा में पहली दफा ही घोषित प्रत्याशी का टिकट कटा है। इससे इतर विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के प्रकरण हो चुके हैं। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में जसपुर विधानसभा से आसाद अली को प्रत्याशी घोषित किया गया था।

15 दिन बाद आसाद का टिकट काटकर मोहम्मद उमर को प्रत्याशी बना दिया गया था। हालांकि इस सीट पर कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में काशीपुर सीट पर घोषित प्रत्याशी का टिकट काटकर बसपा ने किसी दूसरे को प्रत्याशी बनाया था। 

नैनीताल लोकसभा से घोषित प्रत्याशी राजेश दूबे का आपराधिक इतिहास है। इसकी जानकारी पार्टी हाईकमान के पास नहीं थी। निर्वाचन आयोग भी प्रत्याशियों के आपराधिक बैकग्राउंड को लेकर बेहद सख्त है, लिहाजा पार्टी चुनाव में खतरा मोल नहीं ले सकती थी। इसी वजह से हाईकमान ने राजेश की जगह नवनीत अग्रवाल को प्रत्याशी घोषित किया है। नवनीत बरेली के रहने वाले हैं और रुद्रपुर, किच्छा में भी उनका कारोबार है।
- सूरजमल, प्रदेश प्रभारी बसपा। 
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