1989 चुनाव में कांग्रेस के ब्रह्मदत्त दोबारा विजयी रहे
1971 में टिहरी गढ़वाल में राजनीतिक परिदृश्य स्वतंत्र उम्मीदवार महाराजा मानवेंद्र शाह की कांग्रेस उम्मीदवार परिपूर्णानंद पैन्यूली से अप्रत्याशित हार से हिल गया था। ब्रह्मदत्त के लिए चुनाव परिणाम को स्वीकार करना विशेष रूप से कठिन था, जो उनके करीबी लोगों में एक भरोसेमंद व्यक्ति थे। हार को स्वीकार करने में असमर्थ ब्रह्मदत्त ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का कठोर कदम उठाया।
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आरोप लगाया गया कि पैन्यूली ने अनुचित तरीकों से चुनाव जीता है। कोर्ट में मामला लंबा चला। 1991 का चुनाव उनके रिश्ते में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि महाराजा मानवेंद्र शाह बीजेपी और कांग्रेस की ओर से ब्रह्मदत्त उम्मीदवार थे। महाराजा शाह ने यह सीट जीत ली। महाराजा शाह ने संसद की लंबी पारी खेली, जबकि ब्रह्मदत्त ने 1991 की हार से राजनीतिक संन्यास ले लिया था। 1984 में ब्रह्मदत्त टिहरी लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 1989 चुनाव में कांग्रेस के ब्रह्मदत्त पुनः विजयी रहे।
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प्रस्तुति-शीशपाल गुसाईं