हरिद्वार संसदीय सीट का मिजाज बड़ा अनोखा है। इस सीट पर प्रायः बाहरियों का बोलबाला रहा है। 2004 में सपा के स्थानीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। इसके बाद बाकी चुनावों में बाहरी प्रत्याशी जीते।आजादी के बाद यह क्षेत्र देहरादून और सहारनपुर संसदीय क्षेत्र का भाग था। सहारनपुर निवासी अजीत प्रसाद जैन और देहरादून निवासी महावीर त्यागी यहां से सांसद रहे।
निशंक को तो मोदी कैबिनेट के टॉप पांच में शामिल होने का भी सम्मान मिला
उत्तराखंड में शामिल किए जाने के बाद 2004 में केवल एक बार जिला निवासी राजेंद्र बाड़ी हरिद्वार के सांसद बने। उसके बाद तो कभी अल्मोड़ा के हरीश रावत और कभी पौड़ी के डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक को हरिद्वार का सांसद बनने का अवसर मिला। निशंक को तो मोदी कैबिनेट के टॉप पांच में शामिल होने का सम्मान भी मिला।
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मतलब दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हरिद्वार का सांसद बन पाने में सफल हुए। वहीं, इस बार फिर से एक और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हरिद्वार से किस्मत आजमा रहे हैं। पूर्व सीएम हरीश रावत स्वयं तो नहीं आए, उनके बेटे वीरेंद्र रावत चुनाव मैदान में उतारे गए हैं।