हरीश ने हरिद्वार सीट पर प्रचार में मोर्चा संभाला
पूर्व सीएम हरीश रावत से उनकी काफी पुरानी दोस्ती है। एक समय था जब अल्मोड़ा सीट पर हरीश रावत का वर्चस्व था। 1980 में इस सीट पर उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव जीत कर संसद में कदम रखा। उस समय अल्मोड़ा सीट अनारक्षित थी। इसके बाद यहां से तीन बार चुनाव जीत कर सांसद चुने गए। 1980 व 1984 के चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी को पराजित किया।
यही वजह है कि अल्मोड़ा सीट पर चुनाव प्रचार के लिए हरीश की मांग है। उन पर बड़ी जिम्मेदारी हरिद्वार सीट से बेटे वीरेंद्र रावत के प्रचार की है। हरीश के अडिग रहने पर कांग्रेस हाईकमान ने बेटे वीरेंद्र को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। टिकट की घोषणा के बाद से हरीश ने हरिद्वार सीट पर प्रचार में मोर्चा संभाल रखा है। सुबह से शाम तक चुनावी रैली और जनसंपर्क में लगे हुए हैं।
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हरिद्वार सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव ने हरीश को सुखद व दुखद दोनों का साहस कराया है। 2009 में इसी सीट पर चुनाव जीते, लेकिन 2014 के चुनाव में इस सीट पर पत्नी रेणुका रावत शिकस्त मिली। इस बार बेटा चुनाव मैदान में होने से हरिद्वार लोस चुनाव हरीश की साख भी दांव पर है।