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उत्तराखंडः लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में हार पर रार और मंथन, रोड मैप का इंतजार

Tue, 28 May 2019 11:04 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव के नतीजों से कांग्रेस भौचक है। हार पर रार भी चल रही है, तो मंथन भी हो रहा है। औपचारिक समीक्षा की कोई तारीख अभी तय नहीं हुई है। उत्तराखंड कांग्रेस अपने स्तर पर समीक्षा या किसी और कदम के लिए तैयार नहीं है। हाईकमान के रोड मैप का इंतजार किया जा रहा है। इससे पहले, कांग्रेस के दिग्गज नेता अपने-अपने अंदाज में हार के कारणों की तह तक जाने की कोशिश में हैं। कुछ एक मामलों को छोड़ दें, तो बडे़ नेताओं की पूरी कोशिश इस वक्त एकजुटता दिखाने और हार की खीज एक-दूसरे पर न उतारने का मन बनाया हुआ है। बडे़ नेता डरे भी हुए हैं। डर इसी बात का है कि ऐसे मौके पर यदि गुटबाजी का प्रदर्शन किया, तो हाईकमान का कोपभाजन का शिकार न होना पड़ जाए। हालांकि ये भी सच्चाई है कि हार के बाद कई नेता एक-दूसरे के प्रति नाराजगी से भरे पडे़ हैं।

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कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत सोमवार को अचानक कांग्रेस भवन पहुंचे । यहां पर उन्होंने प्रीतम सिंह से मुलाकात की और हार के कारणों पर विचार विमर्श किया। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के ये दोनों ही दिग्गज मैदान में उतरे थे, लेकिन इन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। हरीश रावत नैनीताल और प्रीतम सिंह टिहरी सीट पर बडे़ अंतर से चुनाव हारे हैं। सोमवार को दोनों नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने अपने जीवन काल में कई तरह के उतार चढ़ाव देखे हैं। इन स्थितियों से पार्टी उबरेगी और अपना मुकाम हासिल करेगी।

पूर्व सीएम हरीश रावत का कांग्रेस भवन आने का कोई कार्यक्रम पहले से तय नहीं था। पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि के मौके पर कांग्रेस भवन में कार्यक्रम चल रहा था। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह इसमें शामिल थे। जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ और प्रीतम सिंह कोर्ट के एक पुराने मामले में जाने के लिए तैयार हुए, पूर्व सीएम हरीश रावत वहां पहुंच गए। हरीश रावत के पहुंचने पर प्रीतम सिंह ने उनका स्वागत किया और कुछ देर तक उनके साथ बैठक की। इस दौरान मुख्य रूप से चुनाव के नतीजों पर बात हुई। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने कहा कि हार की वजह जानने के लिए यह औपचारिक बैठक नहीं थी। यह बैठक बाद में तय की जाएगी। लेकिन इतना जरूर है कि कांग्रेस इस स्थिति का मजबूती से सामना करेगी। इस मौके पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, पूर्व संसदीय सचिव विजयपाल सिंह सजवाण भी मौजूद थे।
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एकजुटता का संदेश देने की कोशिश तेज
हार के बाद कांग्रेस में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश तेज हो गई है। एक दिन पहले अपने बयान में हरीश रावत ने प्रीतम सिंह को अपना भाई और इंदिरा हृदयेश को उम्र में बड़ी बताया था। कल भी हरीश रावत देेहरादून में थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस भवन का रुख नहीं किया था। सोमवार को वह कांग्रेस भवन पहुंच गए। हालांकि हरीश रावत के साथ उनकी बहुत लंबी चर्चा नहीं हो पाई, क्योंकि प्रीतम को कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ पुराने केस के सिलसिले में कोर्ट जाना था। प्रीतम के कोर्ट चले जाने के काफी देर बाद तक भी हरीश रावत कांग्रेस भवन में मौजूद रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया और अपनी बात भी साझा की।

बडे़ नेताओं की चुप्पी, छोटों में घमासान
कांग्रेस के बडे़ नेताओं ने चुनावी हार के बाद एकाध मौकों को छोड़कर बाकी समय काफी संयम बरता है। नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने जरूर नतीजे आने के बाद यह कहा था कि हरीश रावत को नैनीताल की जगह हरिद्वार से चुनाव लड़ना चाहिए था। इसका हरीश रावत ने जवाब भी दिया है। इन स्थितियों के बीच, हरीश रावत और प्रीतम सिंह पहले दिन से ही ऐसे बयानों से बच रहे हैं, जिनसे गुटबाजी की ध्वनि निकलती हो। दोनों नेताओं का कहना है कि चुनाव में जिसे जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसने उसे पूरा किया है। एक तरफ, बडे़ नेताओं का यह रुख है, तो दूसरी तरफ, सोशल मीडिया में कांग्रेस के कई नेता एक दूसरे की टांग खिंचाई में उलझे पडे़ हैं। सोशल मीडिया में कांग्रेस बनाम कांग्रेस की स्थिति बनी हुई है।

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