पंतनगर विवि की ओर से टिड्डी दल की उत्तराखंड में निगरानी के लिए गठित समिति के अध्यक्ष डॉ. एसएन तिवारी ने बताया कि शनिवार को टिड्डी दल दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर सक्रिय था लेकिन दिल्ली में पूरी तरह से प्रवेश नहीं कर पाया है।
कहा कि टिड्डियां एक समय में अत्यधिक मात्रा में वनस्पतियों का भक्षण करती हैं र्और मार्ग में आने वाली लगभग समस्त वनस्पतियों को चट कर जाती हैं। टिड्डी दलों के दिखाई देने पर किसानों को अत्यधिक शोर करने (ड्रम व टिन बजाकर) और खेत में धुआं करना चाहिए।
टिड्डी दल दिखे तो यहां करें फोन
डा. तिवारी ने बताया कि किसानों को यदि उनके क्षेत्र में कहीं पर टिड्डी दल का प्रकोप दिखता है तो उन्हें कृषि निदेशालय, उत्तराखंड के फोन नंबर 18001800011 पर अथवा उस जिले के मुख्य कृषि अधिकारी को तत्काल सूचित करना चाहिए।
टिड्डी दलों से फसलों को बचाने के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी का 2.4 मिली. प्रति ली. या क्लोरपाइरीफॉस 50 ईसी का 1.0 मिली. प्रति ली. या डेल्टामेथ्रिन 2.8 ईसी का 1.0 मिली. प्रति ली. या फिप्रोनिल 5 एससी का 0.25 मिली. प्रति ली. या फिप्रोनिल 2.92 एससी का 0.45 मिली. प्रति ली. या लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 5 ईसी का 1.0 मिली. प्रति ली. या लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 10 डब्ल्यूपी का 0.5 ग्राम प्रति ली. या मैलाथियान 50 ईसी का 3.7 मिली. प्रति ली. या मैलाथियान 25 डब्ल्यूपी का 7.4 ग्राम प्रति ली. की दर से छिड़काव करना चाहिए।