निगरानी समिति के अध्यक्ष एवं कीट वैज्ञानिक डॉ. एसएन तिवारी ने बताया कि पंतनगर विवि के सभी केंद्रों को अलर्ट करने के साथ ही आसपास के क्षेत्रों में टिड्डी दलों से बचाव के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके तहत विवि फार्म के लगभग 60 ट्रैक्टरों के साइलेंसरों को निकलवा दिया गया है।
टिड्डी दलों के हमला करने पर ट्रैक्टरों को स्टार्ट करके शोर पैदा किया जाएगा। इसके साथ ही टीन, कनस्तर आदि का बंदोबस्त भी किया गया है। बताया कि टिड्डी दल तीन भागों में विभाजित हो गए हैं। जिनमें से एक दल नेपाल की ओर, दूसरा पीलीभीत की ओर और तीसरा दल बिलासपुर की ओर गया है। इनके तीन भागों में बंटने से फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आएगी।
टनकपुर (चंपावत) क्षेत्र में टिड्डियों के हमले का खतरा फिलहाल टल गया है। शुक्रवार दोपहर किसानों के लिए दहशत लेकर टनकपुर पहुंचा टिड्डियों का दल फिलहाल नेपाल की ओर चला गया है। इससे किसानों के साथ ही प्रशासन और कृषि विभाग ने राहत की सांस ली है। टिड्डियों के हमले से सुरक्षा को लेकर कृषि विभाग चौकस है। कृषि विभाग को अभी अंदेशा है कि टिड्डियों का दल दोबारा इस ओर आ सकता है।
उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में फसलों का तबाह कर चुके टिड्डियों का बड़ा दल शुक्रवार को टनकपुर क्षेत्र में उड़ता नजर आया। इसके बाद समूचे क्षेत्र में टिड्डियों के हमले की चर्चा आम हो गई। सूचना पर प्रशासन और कृषि विभाग ने भी फौरन सुरक्षात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए, लेकिन राहत की खबर यह रही की क्षेत्र में कहीं भी फसलों पर टिड्डियों के हमले की सूचना नहीं मिली।
मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि यहां आया टिड्डियों का दल नेपाल सीमा की ओर से आया था, जो वहीं लौट गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के किसी भी गांव में फसल पर टिड्डियों के हमले की सूचना नहीं है। मुख्य कृषि अधिकारी के मुताबिक टिड्डियां ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ सकतीं हैं। ऐसे में टिड्डियों का पहाड़ पर चढ़ना संभव नहीं है। मुख्य कृषि अधिकारी के मुताबिक हालांकि अभी टिड्डियों के हमले का खतरा टला नहीं है, लेकिन विभाग ने इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।