लॉकडाउन में 50 दिन से हरिद्वार के विभिन्न होटलों में ठहरे पश्चिम बंगाल के 500 से ज्यादा यात्री बीती रात बसों में सवार होकर अपने गृह प्रदेश के लिए रवाना हो गए। मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर लॉकडाउन के दौरान मदद करने वाले लोगों का उन्होंने आभार जताया।
इस दौरान होटल एसोसिएशन के सदस्यों ने रास्तेभर के लिए उनके भोजन की भी व्यवस्था की। इन सभी तीर्थयात्रियों को हरिद्वार के होटल व्यवसायियों ने 22 मार्च से अपने यहां निशुल्क ठहराया हुआ था। वहीं जिला प्रशासन के सहयोग से इनके भोजन आदि की व्यवस्था व्यापार मंडल और होटल एसोसिएशन ने की थी।
इस दौरान होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, व्यापार मंडल के जिला महामंत्री संजीव नैयर, युवा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष संदीप शर्मा, वरिष्ठ व्यापारी नेता संजय त्रिवाल, तुषार शर्मा, हिमांशु शर्मा, भगवत शर्मा , संदीप कपूर, राजकुमार धीमान, प्रदीप कालरा, विभाष मिश्रा, हरीश सतवानी, हरिशंकर, अनुराग शर्मा रवि शंकर आदि मौजूद रहे।
चंपावत, अल्मोड़ा, पौड़ी जनपद के सैकड़ों लोग घर जाने की उम्मीद में भल्ला स्टेडियम पहुंच गए। उन्होंने घर भेजने की गुहार लगाई, लेकिन कोई प्रक्रिया न होने पर उन्हें पूरे दिन खड़े रहने के बाद वापस लौटना पड़ा। सभी लोग सामान और पत्नी बच्चों के साथ पहुंचे थे।
सोमवार को चंपावत के 50, अल्मोड़ा के 40 और पौड़ी के सौ से अधिक लोग परिवार के साथ भल्ला स्टेडियम पहुंच गए। वे सभी सुबह तड़के तीन बजे पहुंच गए थे। उन्हें भल्ला स्टेडियम के अंदर नहीं दिया तो वे बाहर सड़क पर बैठ गए। चंपावत के नवीन चंद्र भट्ट, संदीप शर्मा ने बताया कि वे हरिद्वार के होटलों में काम कर रहे थे, लेकिन अब कोई काम न होने पर घर जाने के लिए निकल पड़े।
पौड़ी के देवेंद्र अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ स्टेडियम के बाहर खड़ा हुआ था, लेकिन कोई प्रक्रिया न होने पर मायूस थे। पौड़ी निवासी गोवर्धन, भीम चंद्र, संजय पंत, श्रमेंद्र रावत, प्रसन्ना पंत, अंजू द्विवेदी, प्रियाशु, देवेंद्र, इशिका, सुंदर सिंह, पूनम आदि ने बताया कि जिन होटलों में काम करते थे, वह ठेके पर लिए हुए थे। लॉकडाउन के बाद ठेकेदारों से कोई संपर्क नहीं हो सका। अब उनके पास पैसे नहीं बचे हैं।
नहीं दिया राशन
होटलों, लॉज, गेस्ट हाउसों में काम करने वालों को हरिद्वार के समाजसेवियों ने राशन तक नहीं दिया। कुछ संस्थाएं भोजन तो एक समय का दे रही थी, उससे ही पेट भर रहे थे, लेकिन जब राशन मांगा तो उन्होंने वोटर कार्ड मांगा, न होने की बात सुनने पर उन्हें राशन के टोकन तक नहीं दिए। कुशावर्त घाट पर एक लॉज में करने वाले चंद्रशेखर, अमित कांडपाल, हेमेंद्र बिष्ट आदि ने बताया कि लाइनों में लगकर कब तक रोटी खाते। यदि वे यहां के वोटर होते तो उन्हें भी राशन मिल जाता। इसलिए घर जाने को मजबूर होना पड़ा।