देहरादून 24000
हरिद्वार 833
टिहरी 4050
पौड़ी 1655
उत्तरकाशी 2103
चमोली 2259
रुद्रप्रयाग 207
नैनीताल 59
यूएसनगर 305
चंपावत 2568
पिथौरागढ़ 1344
बागेश्वर 1134
अल्मोड़ा 2613
कुल 43130
पलायन करने वालों की संख्या हमारे यहां इतनी नहीं है जितनी की दिल्ली और अन्य कई राज्यों में। रिलीफ कैंप तो नहीं बनाए गए हैं लेकिन लोगों की मदद की जा रही है। मूवमेंट को कम से कम करने के लिए यह जरूरी भी है।
-अमित नेगी, सचिव आपदा प्रबंधन
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हजारों की संख्या में दूसरे राज्यों से अपने गांव लौटे लोगों को सचेत किया है। उन्होंने कहा कि अगर ये लोग होम क्वारंटीन में नहीं रहेंगे, तो दूरस्थ इलाकों में महामारी फैल सकती है। हमारी स्वास्थ्य सेवाएं इतनी सक्षम नहीं हैं कि दूरस्थ क्षेत्रों में इलाज हो सके। ऐसे में अपने घर पर सामाजिक दूरी का अनुपालन करें।
मुख्यमंत्री ने फेसबुक लाइव पर प्रदेश की जनता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के निवासी फंसे हुए हैं। वे लगातार सरकार से घर सुरक्षित पहुंचाने की अपील भी कर रहे हैं। उनकी परेशानी समझी जा सकती है, लेकिन महामारी से लड़ाई में कुछ कष्ट सहने होंगे। कोरोना संक्रमण के चलते केंद्र सरकार की सख्त गाइडलाइन का अनुपालन सभी को करना है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा। सभी राज्य सरकारें यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही हैं। उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में देश विदेश के पर्यटक और अन्य राज्यों के कामगार फंसे हैं।
हम उनका पूरी तरह से ख्याल रख रहे हैं। सरकार कोशिश कर रही है कि हर जरूरतमंद तक पहुंचे। जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश है कि सबके ठहरने और खाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
प्रदेश सरकार की बड़ी चिंता दूरस्थ गांवों को लेकर जहां अन्य राज्यों से आए उत्तराखंडवासी पिछले कुछ दिनों में पहुंचे हैं। ऐसी सूचना मिली है कि लौटे लोग गांवों में घूम फिर रहे हैं। फुटबॉल, वॉलीबाल और क्रिकेट खेल रहे हैं। यह बिल्कुल गलत है। उनकी एक गलती गांवों को कोरोना की चपेट में ला सकती है। अपने परिवार और अपने लिए ये लोग होम क्वारंटीन और सामाजिक दूरी का अनुपालन करे। 14 दिन ऐसा करने के बाद वह गांवों वालों से मिलजुल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन जनता अच्छे से पालन कर रही है। लेकिन जाने अंजाने में कुछ लोग भीड़ जमा कर रहे हैं। ऐसे लोगों को समझना होगा कि अगर निर्देशों का अनुपालन नहीं हुआ तो स्थिति बिगड़ सकती है। यह वायरस कब आपके अंदर घर बना ले, इसका पता नहीं चलेगा। अगर आप सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करें तो कोरोना का जीरो बजट में इलाज संभव है।