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Lockdown 4.0 : सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बहाल करने को जारी एसओपी का उत्तराखंड परिवहन महासंघ ने किया विरोध

Fri, 22 May 2020 01:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • परिवहन सचिव को पत्र भेजकर बसों के संचालन को लेकर जताई असमर्थता
  • जीएमओयू, टीजीएमओयू समेत सात यूनियनों की तरफ से संचालित की जाती हैं 10
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्य सरकार की ओर से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बहाल करने को लेकर जारी की गई एसओपी का उत्तराखंड परिवहन महासंघ ने विरोध कर दिया है। परिवहन महासंघ की ओर से बुलाई गई आपात बैठक में गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, टिहरी गढ़वाल मोटर्स ओनर्स यूनियन, रूपकुंड पर्यटन विकास, गढ़वाल मंडल बहुउद्देशीय यूनियन समेत निजी बसों को राज्य के विभिन्न इलाकों में संचालित करने वाली सात यूनियनों ने बसों के संचालन का बहिष्कार कर दिया है।

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यूनियन पदाधिकारियों की आपात बैठक में सहमति बन जाने के बाद परिवहन सचिव को पत्र लिखकर महासंघ के निर्णय से अवगत करा दिया गया है। बता दें कि यूनियनों की ओर से 10 हजार से अधिक बसों का संचालन राज्य के विभिन्न इलाकों में किया जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को बहाल करने में इन यूनियनों का अहम योगदान है। अब सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बहाल करने को लेकर सरकार ने जो एसओपी जारी की है, उसके अनुसार गाड़ियों के संचालन को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं।

महासंघ अध्यक्ष सुधीर राय ने बताया कि सभी यूनियनों के पदाधिकारियों की बृहस्पतिवार को आपात बैठक हुई। जिसमें नई एसओपी के मुताबिक गाड़ियों के संचालन को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान सभी यूनियनों के पदाधिकारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 50 फीसदी सीटों पर यात्रियों को यात्रा कराने से इनकार कर दिया है।
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महासंघ अध्यक्ष राय ने बताया कि आपात बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार एसओपी में बदलाव नहीं करती है गाड़ियों का संचालन नहीं किया जाएगा। महासंघ पदाधिकारियों ने मांग उठाई है कि 50 फीसदी सीटों पर यात्रियों के साथ गाड़ियों का संचालन करना पड़ा तो बाकी 50 फीसदी घाटे की भरपाई राज्य सरकार करें।

साथ ही डीजल को जीएसटी से बाहर किया जाए इसके अलावा विक्रम और ऑटो में सवारी बैठाने की सीमा चार करने के साथ ही किराये में 50 फीसदी की वृद्धि की जाए। यदि टैक्सी, मैक्सी और कैब को 50 फीसदी यात्रियों के साथ संचालित किया जाता है तो किराये में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए।

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