लॉकडाउन में फंसे नेपाली श्रमिक बहुत परेशान हैं। प्रति मिनट कॉल दर 12 रुपये होने से अब वह अपने घर बात भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। राज्य सरकार और जिला प्रशासन उन्हें अपने मूल देश जाने के लिए लॉकडाउन पास भी जारी नहीं कर रहा है। पहले 31 मार्च के बाद अधिकतर नेपाली श्रमिक घर लौट जाते थे, लेकिन इस बार प्रदेश में 22 मार्च से आवाजाही बंद होने के कारण नेपाली श्रमिक घर नहीं लौट सके।
नेपाली श्रमिकों को स्वदेश ले जाने के प्रति नेपाल सरकार की चुप्पी से भी उनमें आक्रोश है। बृहस्पतिवार को भी कई नेपाली श्रमिक यात्रा पास बनाने के लिए एसडीएम गरुण के कार्यालय पहुंचे। वह कई घंटे तक वहां बैठे थे लेकिन पास नहीं बनने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। नेपाल मूल के नर बहादुर ने बताया कि कुमाऊं से नेपाल जाने के लिए धारचूला, झूलाघाट, बनबसा के पुल कर पार नेपाल
पहुंचा जा सकता है।
तीनों पुल बंद हैं। डीएम रंजना राजगुरु ने बताया कि जिले विभिन्न कस्बों में नेपाली श्रमिक हैं। प्रशासन ने उन्हें रसद सामग्री उपलब्ध कराई है। चंपावत के डीएम से रोज बात होती है। नेपाल सरकार से अनुमति मिलने पर ही नेपाली श्रमिकों को यहां से भेजा जाएगा।