सपने पूरे करने शहर गए थे, लेकिन वहां सपने के साथ हौसले भी टूट चुके हैं। संकट में मकान मालिक व नियोक्ता ने भी मदद नहीं की। अब सोच लिया है गांव में ही पूरी जिंदगी बिताएंगे। कई चंडीगढ़ में फंसे रहे प्रवासियों ने दून पहुंचने पर अपनी पीड़ा बयां की।
चंडीगढ़ व अन्य राज्यों में फंसे प्रवासियों को रोडवेज की बसों में लाकर उनके घर पहुंचाया जा रहा है। दून में पहुंचे ऐसे ही कुछ लोगों से बात की कई तो आपबीती बयां करते हुए उनका दर्द जुबां पर आ गया। परदेस में फंसे रहने के वक्त की पीड़ा को याद कर भावुक हो गए।
कई लोगों ने कहा कि अब उनका दोबारा शहर जाने का मन नहीं है। होटल, दुकान, शॉपिंग मॉल व अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले इन लोगों ने कहा कि उन्हें वेतन नहीं दिया गया। नौकरी से निकालने की नौबत तक आ गई। जेब में पैसे नहीं थे, लेकिन मकान मालिक किराया देने का दबाव बनाते रहे। जो पैसे बचाकर रखे थे, उनसे किराया चुकाना पड़ा। अब वे अपने गांव ही रहना चाहते हैं।
मैं होटल में काम करता था। लॉकडाउन में होटल बंद हो गए। उन्हें वेतन भी नहीं दिया। मकान मालिक ने भी किराया लिया। शहर में मरने से अच्छा है अपने गांव में ही रहें।
- पुष्पेंद्र, बड़कोट
मैं चंडीगढ़ के मॉल में काम करता था। मुझे आधे से भी कम वेतन मिला। किराया पूरा देना पड़ा। खाने के लाले पड़ गए थे। आज दुख हो रहा है कि वहां गया ही क्यों।
- उपेंद्र सिंह