लॉकडाउन 3.0 में उत्तराखंड की पांच हजार से अधिक पंचायतों को ग्राम सभा की खुली बैठक आयोजित कराने से निजात मिल गई है। ये पंचायतें अब पंचायत समितियों की बैठकों के जरिए ही ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को अंतिम रूप दे सकेंगी। यह समय पंचायतों के लिए सालभर की विकास योजनाओं को अंतिम रूप देकर केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करने का भी है।
ग्राम पंचायतें सामान्य रूप में ग्राम सभा की बैठक कर ही इस योजना को अंतिम रूप दे पाती हैं। प्रदेश में 7791 ग्राम पंचायतें हैं और इनमें से करीब 2400 ने ही ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को अंतिम रूप देकर अपलोड किया है।
कोरोना संकट के कारण सोशल डिस्टेंसिंग के नियम के कारण अब ग्राम पंचायतें ग्राम सभा की खुली बैठक का आयोजन भी नहीं कर पा रही हैं। मुसीबत यह है कि जून तक हर हाल में इन पंचायतों को यह योजनाएं अपलोड करनी हैं। पंचायतों को इस मुसीबत से अब केंद्र ने निजात दिलाई है।
पंचायत निदेशालय के मुताबिक केंद्र ने आदेश जारी कर दिया है। पंचायतों को कहा गया कि पंचायत समिति ही अपने स्तर पर इस प्लान को बनाकर सर्वर पर अपलोड करे। हालात सामान्य होने पर पंचायतों को ग्राम सभा की खुली बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृत कराना होगा। जून तक इन योजनाओं को अमली जामा पहना लिया जाएगा।
इससे जून में केंद्र सरकार की ओर से 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पैसा जारी किया जाएगा। योजना को अगर अनुमोदन न मिला तो यह पैसा भी जारी नहीं होगा। पंचायत निदेशक हरीश चंद्र सेमवाल के मुताबिक इस रियायत के चलते पंचायतों में अब विकास के काम भी जल्द शुरू हो पाएंगे।