रुड़की डिपो की बस संख्या यूके 07 पीए-3106 के चालक मनोज ने बताया कि गुरुग्राम से यहां आने वाले यात्रियों के लिए स्थानीय सरकार की ओर से खाने के नाम पर जो इंतजाम किए गए थे वे नाकाफी थे।
बस में जो 40 सवारी बैठे थे, उन्हें खाने के नाम एसडीआरएफ की ओर से बिस्कुट के 12 पैकेट और आधा लीटर कानी की 20 बोतलें दी र्गइं, जो कुछ ही देर में खत्म हो गई। यात्रियों के बच्चे भूख-प्यास से रोते रहे।
आधे रास्ते में बस रोकर बोतलों में पानी भरवाया। नारसन बॉर्डर पर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने के बाद खाने के के पैकेट मिले।
रुड़की रोडवेज डिपो से शनिवार को रात 10.30 बजे बस लेकर गुरुग्राम के लिए रवाना हुए। रात करीब ढाई बजे बस गुरुग्राम के स्टेडियम में पहुंची, लेकिन वहां पर हरियाणा सरकार की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया। आराम, चाय, नाश्ते, खाने का कोई इंतजाम नहीं था। भूखे पेट बस चलानी पड़ी। उत्तराखंड बॉर्डर पर खाना मिला तो जान में जान आई।
- पवन कुमार, रोडवेज बस चालक
शनिवार देर रात रुड़की डिपो से बस लेकर गुरुग्राम रवाना हुआ। परिचालक भी साथ था। रविवार तड़के हरियाणा के गुरुग्राम स्टेडियम पहुंचे। वहां से 10.30 बजे उत्तराखंड के प्रवासियों को लेकर चले, लेकिन इस दौरान चाय, नाश्ता, खाना कुछ नहीं मिला। खाली पेट ही बस चलाकर नारसन बॉर्डर पहुंचे। यहां खाने के पैकेट मिले तो राहत मिली।
- रामभूल सिंह, रोडवेज बस चालक
गुरुग्राम में चालक और परिचालकों के लिए खाने व आराम का इंतजाम हरियाणा सरकार को करना था। नारसन बॉर्डर पर आने के बाद यात्रियों और चालक-परिचालकों को भोजन के पैकेट बांटे गए। चालक-परिचालकों को सैनिटाइजर और मास्क भी दिए जा रहे हैं।
- आलोक बनवाल, एजीएम, रुड़की रोडवेज डिपो