जबकि, मुस्लिम समाज में शादियां फरवरी, मार्च से हो रही हैं, जो रमजान शुरू होने से पहले तक चला। लॉकडाउन के चलते ज्यादातर शादियां तो हो गईं, लेकिन कार्ड दुकानों पर ही पड़े हैं। आगे भी जो शादियां हैं, उनका भी कार्ड कैंसिल करवाया जा रहा है। जिले में प्रिंटिंग प्रेस मालिकों को 50 लाख का नुकसान हुआ है।
प्रिंटिंग प्रेस व्यवसायियों का कहना है कि 50 हजार से अधिक कार्ड के ऑर्डर कैंसिल हो चुके हैं। गोदाम कार्ड और पेपर से भरे पड़े हैं। हर बार जून तक गोदाम खाली हो जाता था और नवंबर के लिए नया माल आता था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस बार भारी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई लंबे समय तक नहीं हो पाएगी।
कार्ड लेने से कर रहे मना
कार्ड छपवाने का ऑर्डर देने वाले लोग अब इन्हें लेने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि समारोह स्थगित हो गए तो कार्ड का अब क्या करेंगे? कार्ड व्यवसायी बताते हैं कि ग्राहकों से 30 से 50 प्रतिशत रकम एडवांस में लेकर ही कार्ड छापा जाता है। मसलन, एक ग्राहक अगर 1100 कार्ड का ऑर्डर देता है तो वह एडवांस में केवल 500 रुपये ही देता है।