राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रसव कराने और जच्चा-बच्चा को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए फूल प्रूफ रणनीति तैयार की है। इसमें सभी डॉक्टरों और स्टाफ का बड़ा योगदान रहा। अस्पताल में जब भी कोई नया बच्चा जन्म लेता है तो स्टाफ में जीवन को लेकर नई स्फूर्ति का संचार होता है।
यह रही स्थिति
-15 मार्च को दून अस्पताल में कोरोना का पहला मरीज भर्ती हुआ। 15 मार्च से 31 मार्च तक दून अस्पताल में 107 शिशुओं ने जन्म लिया।
-एक अप्रैल से 11 मई तक 54 शिशुओं ने दून अस्पताल के जनरल लेबर रूम में जन्म लिया।
-अस्पताल में पैदा होने वाले 34 शिशु ऐसे हैं, जिनकी माताओं को कोरोना संदिग्ध के रूप में भर्ती किया था। इन महिलाओं का प्रसव आइसोलेशन वार्ड में किया।
-34 में से एक महिला में कोरोना पॉजिटिव भी पाया गया था। अब जच्चा बच्चा स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं।