उत्तर रेलवे ने सार्वजनिक परिसर पर कथित अनाधिकृत कब्जे को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे के न्यायालय सम्पदा अधिकारी (प्रथम) उत्तर रेलवे मुरादाबाद की ओर से स्थानीय लोगोंं को सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं।
उत्तर रेलवे के संपदा अधिकारी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि कुछ लोग रेलवे के सार्वजनिक परिसर में अनाधिकृत रूप से रह रहे हैं या कब्जा किए हुए हैं। इस संबंध में सात दिन के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सम्पदा अधिकारी कार्यालय की ओर से संबंधित व्यक्ति को सुनवाई और जवाब दाखिल करने के लिए संपर्क कैम्प कार्यालय, उत्तर रेलवे मुरादाबाद में उपस्थित होने को कहा गया है।
वहीं रेलवे के अधिकारी जब नोटिस लेकर झड़ीपानी पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने रेलवे पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। स्थानीय निवासी सतीश कुमार ने बताया कि रेलवे हर बार झड़ीपानी जमीन पर अपना दावा करता है। रेलवे के पास इस संबंंध में कोई दस्तावेज नहीं हैं। रेलवे की इस कार्रवाई से लोग परेशान हैं। भूमिधरों के पक्षकार अजय गोयल ने कहा कि 16 जून को हाईकोर्ट के निर्देश पर भूमि का सीमांकन किया गया था। 8 जुलाई को संयुक्त कमेटी ने सीमांकन कर पिलर लगाए थे। गुरुवार को रेलवे के अधिकारियों ने पिलर हटाकर हस्तक्षेप किया है। इस संबंध में भूमिधरों ने सिविल न्यायालय में रेलवे के अधिकारियों के खिलाफ निषेधाज्ञा का वाद योजित किया है। न्यायालय ने रेलवे,
कलेक्टर से एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। इस अवसर पर प्रदीप भंडारी, गौरव रावत, सतीश कुमार, कमलेश भंडारी, भावना गोस्वामी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
संपदा अधिकारी मुरादाबाद के आदेश पर नोटिस दिए जा रहे हैं। जमीन रेलवे के दस्तावेज में मौजूद है। सड़क से ऊपर का हिस्सा रेलवे का है। इस भूमि का कोई सीमांकन नहीं हुआ है। रेलवे को पता चला है कि जमीन रेलवे की है। मुरादाबाद से नोटिस आए हैं और लोगों के घरों पर चस्पा करने के निर्देश हैं। अभी घरों को खाली करने के लिए नहीं कहा गया है। - आशू शर्मा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर उत्तर रेलवे