निरंजनपुर मंडी में अब फल-सब्जियों के साथ ही फूलों और स्थानीय अनाजों का कारोबार भी होगा। किसान सीधे मंडियों के साथ ही उप मंडियों में भी अपने उत्पाद बेच सकेंगे, जहां से इन्हें फुटकर बाजार में बेचा जाएगा।
निरंजनपुर मंडी स्थित कार्यालय में बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए अध्यक्ष राजेश शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहाड़ के अनाज मंडवा, झंगोरा, चौलाई की बाजार में बहुत अधिक डिमांड है। अभी किसान को अपने उत्पाद बेचने के लिए परेशान होना पड़ता है। इसलिए मंडी में उन्हें उत्पाद बेचने की सुविधा दी जा रही है।
मंडी समिति खुद पहाड़ी उत्पादों की बिक्री करेगी। नए नियमों के तहत किसानों को लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। साथ ही वो कहीं भी अपना उत्पाद बेच सकते हैं। सरकार ने चौलाई का 5200 रुपये, झंगोरा का 2000, मंडवा का 3295, काली सोयाबीन का 4200 और सफेद सोयाबीन का 3200 रुपये क्विंटल एमएसपी तय किया है।
200 करोड़ है फूलों का सालाना कारोबार
राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश में फूलों का करीब 200 करोड़ रुपये सालाना का कारोबार है। अब तक फूलों की कोई मंडी नहीं है। किसानों को अपने फूल दिल्ली की मंडी में बेचने पड़ते हैं। जहां से इन्हें फुटकर बिक्री के लिए खरीदकर वापस लाया जाता है। इससे फूलों की कीमत में बढ़ोतरी होती है। स्थानीय स्तर पर बिक्री होने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकेगा। वहीं, फूलों की कीमत में भी कमी आएगी।