कैंट क्लेमेंटटाउन में लोन फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया है। एक बाहरी व्यक्ति और अन्य कर्मचारियों ने बैंक से लोन लेने में फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था। पे स्लिप से लेकर हस्ताक्षर और कैंट बोर्ड की मुहर सभी फर्जी पाए गए हैं। मामले में बैंक की भी लापरवाही सामने आई है। बैंक ने बिना कैंट बोर्ड की एनओसी और बिना दस्तावेजों की जांच के ही लोन स्वीकृत कर दिया था।
मामले में अब कैंट बोर्ड प्रशासन फर्जीवाड़ा करने वाले एक बाहरी व्यक्ति और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कह रहा है। साथ ही बैंक की भी शिकायत उच्च स्तर पर करने की बात कही जा रही है। बतादें कि जनवरी में कैंट बोर्ड में लोन फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। कमल कुमार नाम के व्यक्ति ने खुद को कैंट बोर्ड देहरादून का कर्मचारी बताते हुए जिला सहकारी बैंक से लोन लिया था। लोन की किश्त न भरने पर जब बैंक की ओर से कैंट बोर्ड को पत्र भेजा गया तो मामला सामने आया। कैंट बोर्ड की ओर से आंतरिक जांच की गई तो पता चला कि कमल कुमार के साथ ही कैंट बोर्ड के कई ओर कर्मचारियों ने भी बिना कैंट बोर्ड सीईओ की अनुमति के बैंक से लोन लिया है।
आंतरिक जांच में यह भी पता चला कि सीईओ के साथ ही किसी अन्य अधिकारी कर्मचारी को लोन लेने वाले कर्मचारियों के सत्यापन के बारे में कोई पत्र बैंक की ओर से नहीं आया। इस संबंध में जब कैंट सीईओ की ओर से बैंक से लोन के दस्तावेज तलब किए गए तो पे स्लिप से लेकर हस्ताक्षर, कैंट बोर्ड की मुहर सब फर्जी पाए गए। अब सीईओ अभिषेक राठौर ने फर्जीवाड़ा करने वाले सभी कर्मचारियों को नोटिस देकर जवाब-तलब किया है। साथ ही खुद को कैंट का कर्मचारी बताकर लोन लेने वाले कमल कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत की बात कही है।
कैंट बोर्ड के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
लोन फर्जीवाड़े में कैंट बोर्ड के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। हालांकि, कैंट बोर्ड प्रशासन इससे इंकार कर रहा है। बताया जा रहा है कि जिस कमल कुमार ने खुद को कैंट बोर्ड का कर्मचारी बताया है, उसका कोई रिश्तेदार कैंट बोर्ड क्लेमेंटटाउन में उच्च पद पर आसीन है। सूत्रों के अनुसार उसी की शह पर कैंट बोर्ड देहरादून का पे स्लिप आदि बनाए गए और मामले को कई दिनों तक दबाए रखा।
बैंक से प्राप्त दस्तावेजों में साफ है कि कैंट बोर्ड से लोन लेने के लिए कोई भी अनुमति नहीं दी गई है। जितने भी दस्तावेज कर्मचारियों ने जमा किए हैं, सभी फर्जी हैं और कैंट बोर्ड अधिकारियों के फर्जी साइन और मुहर लगाई गई है। मामले में बैंक ने बड़ी लापरवाही बरती है। कमल कुमार और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अभिषेक राठौर, सीईओ, कैंट बोर्ड क्लेमेंटटाउन
यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। बैंक की ओर से वाकई में चूक हुई है। सत्यापन के लिए जो पत्र भेजा जाना चाहिए था वह नहीं भेजा गया। मामले में कैंट बोर्ड सीईओ से बात हो गई है। अगर कैंट बोर्ड जांच करता है तो सहयोग दिया जाएगा। सभी कर्मचारियों से वसूली कर ली गई है। भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश बैंक कर्मचारियों को दिए गए हैं।
- रोहित बिष्ट, मैनेजर, जिला सहकारी बैंक, प्रेमनगर शाखा