इस वक्त सुबह के 11.30 बजे हैं। बहुत सख्त धूप है। पारा 50 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। दोपहर ढाई-तीन बजे तक पारा 50 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाने की उम्मीद है। कल भी पारा 50 के पार पहुंचा था। मक्का में सड़कों के किनारे स्ट्रीट लाइट के खंभों की तरह फव्वारे लगा दिए गए हैं। पानी की ठंडी बूंदें पड़ने पर राहत मिल रही है। आज (शुक्रवार) दूसरे दिन फिर जमरात शैतानों को कंकड़ियां मारने जाना है। कल (बृहस्पतिवार) सिर्फ बड़े शैतान को कंकड़ी मारी गई थी और आज तीनों शैतानों को कंकड़ियां मारनी हैं।
जहां हम ठहरे हैं वहां से जमरात तीन किमी की दूरी पर है और जमरात से खाना-ए-काबा आठ किमी है। कुल 11 किमी की दूरी तय करनी है। ज्यादातर लोग पैदल ही जा रहे हैं।
हादसे के बाद कल हज समिति ने जमरात इकट्ठे जाने से मना कर दिया था। आज हज यात्रियों को ले जाने के लिए बसें लगाई गई हैं। हिदायत दी गई है कि सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता जाएंगे। हादसे के बाद कुछ लोग ‘मिसिंग’ थे, वे देर रात अपनी कयामगाह में लौट आए। हम लोग शैतानों को कंकड़ियां मारने के लिए जा रहे हैं। तेज धूप हलक सुखा रही है।
हादसे के एक दिन बाद सब हुआ सामान्य
जमरात में यह वही जगह है जहां बृहस्पतिवार दोपहर हादसा हुआ था। इस वक्त लग रहा है जैसे यहां कुछ हुआ ही नहीं है। सब कुछ बिल्कुल सामान्य लग रहा है। लोग बहुत आराम से शैतानों को कंकड़ियां मार रहे हैं।
तीन हेलीकॉप्टर पूरे इलाके का गश्त कर रहे हैं। एंबुलेंस के कई वाहन अलग-अलग स्थानों पर स्टेशन किए गए हैं। हम लोग शैतानों को कंकड़ियां मारकर बाहर निकल आए हैं। अब लाखों की संख्या में लोगों का रुख खाना-ए-काबा की तरफ है।
खाना-ए-काबा में तवाफ (परिक्रमा) करना है। बृहस्पतिवार को 60 फीसदी लोगों के नाम की जानवरों पर कुर्बानी हो गई थी, जो 40 फीसदी लोग बचे थे उनके नाम की कुर्बानी आज हो रही है।
विशेष सहयोग- हाजी राव शेर मोहम्मद, चेयरमैन हज समिति उत्तराखंड
प्रस्तुति- रजा शास्त्री-9675898214
पाठकों की राय
-सफर-ए-हज बहुत अच्छा रहा। इसे पढ़कर हज की तस्वीर जेहन में उभर आती रही। हज प्रक्रिया का खाका बहुत अच्छी तरह खींचा गया।
-मौलाना मोहम्मद अहमद कासिमी, काजी-ए-शहर, देहरादून
-सफर-ए-हज पढ़कर बहुत अच्छा लगा। आंखें नम हो गईं। पढ़ने पर ऐसा लगा कि अपनी आंखों से सब कुछ देख रहा हूं। जेहनी तौर पर हज में शामिल हो गया।
-मोहम्मद वसीम, कपड़ा व्यापारी, पिरान कलियर