रिहायशी क्षेत्रों में शराब की दुकानें खुलने का विरोध हुआ तो आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को बड़े अजीबो-गरीब आधार पर लाइसेंस लेने का विकल्प दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत शिफ्टिंग के जद में आए जो ठेकेदार महीने भर के लिए ठेका नहीं लेना चाहते, उन्हें दैनिक लाइसेंस दिया जाएगा। यानी एक जगह दुकान नहीं चली या विरोध हुआ तो अगले दिन दूसरे मोहल्ले का ठेका ले लीजिये।
यह आदेश जारी करने के पहले यह भी ध्यान नहीं रखा गया कि प्रतिदिन लाइसेंस की प्रक्रिया, प्रकाशन आदि कार्य कैसे होंगे? यह कार्य कौन करेगा? क्या इसके लिए पर्याप्त स्टाफ है? अगर एक स्थान पर अधिक ठेकेदार आ गए तो लाइसेंस देने का सिस्टम क्या रहेगा?
उपरोक्त सवालों का जवाब तलाशे बगैर, आबकारी विभाग ने आनन-फानन में यह व्यवस्था कर दी है। यह भी तय कर दिया है कि शराब की बिक्री का आठ फीसदी लाइसेंस फीस के रूप में लिया जाएगा।
इस संबंध में विभाग की ओर से सभी जिला आबकारी अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश भी जारी कर दिए गए, लेकिन इस संबंध में ठेकेदारों से मशविरा नहीं किया गया कि क्या वे हर रोज मोहल्ला बदल कर ठेलेवाले की तरह शराब बिक्री कर पाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक अप्रैल से नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाली 402 दुकानों को बंद कर दिया गया है। इन दुकानों को रिहायशी इलाकों में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पूरे प्रदेश में भारी विरोध हो रहा है।
लोगों के विरोध को देखते हुए ठेकेदार भी दुकान खोलने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। शराब की कुल 532 दुकानों में से अब तक 209 ने पैसा जमा कराया है। इसमें वो दुकानें भी शामिल हैं जो शिफ्ट नहीं हुई है। जिन दुकानों ने पैसा जमा कराया है उसमें आधे से अधिक पब्लिक के विरोध की वजह से नहीं खुल पाईं हैं।