इस पर पुलिस ने विवेचना शुरू की। पुलिस की ऑपरेशन स्माइल टीम दोनों की तलाशी में जुट गई। खोज के दौरान बनबसा बैराज पुल के समीप पीड़िता को आरोपी के साथ पकड़ा गया।
5 मार्च वर्ष 2018 को पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले में बुधवार को विशेष न्यायाधीश राजेंद्र सिंह चौहान ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद पोक्सो अधिनियम, अपहरण, डराने, धमकाने, शादी करने के लिए विवश करने के मामले में दोष सिद्ध होने पर अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एक लाख पांच सौ रुपये के अर्थदंड से दंडित भी किया। सरकार की ओर से मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पंत ने की।