उत्तराखंड आपदा के जख्म शदियों तक इतिहास के पन्नों पर दिखाई देते रहेंगे, जिनमें जिंदगी की टूटी हुई बागडोर और पीछे छूट चुके हाथों का दर्द हमेशा महसूस किया जाता रहेगा।
अगर पूरी संवेदनशीलता के साथ उसकी आंखों में झांकेंगे तो आपको पहाड़ पर आई जलप्रलय की झलक का असर दिखेगा। दून अस्पताल में भरती किशोर शुभम (15) तबाही देखकर स्तब्ध सा हो गया है।
दिमाग पर ऐसा असर पड़ा कि उसके समझ में अब कुछ नहीं आता। कुछ नहीं बोलता न अपने बारे में और न उस हादसे के बारे में जिसने उसे गुमसुम कर दिया है।
शनिवार शाम 5 बजे शुभम को एंबुलेंस सेवा 108 से पुलिस ने दून अस्पताल पहुंचा दिया। उसे गुप्तकाशी से रेस्क्यू करके यहां लाया गया था। पुलिसवालों ने बताया कि किशोर से बहुत पूछताछ की गई लेकिन वह अपना नाम भर बता पाया। इसके अलावा कुछ नहीं बोला। बाद में इलाज के लिए उसे अस्पताल में भरती करा दिया गया।
डा. पीके पंवार ने बताया कि किशोर डिप्रेशन में है। इसे पोस्ट ट्रॉमेटिक डिस्आर्डर कहते हैं। कोई बड़ा हादसा देख लेने पर बच्चों या अतिसंवेदनशील व्यक्ति के दिमाग पर ऐसा असर आ जाता है। उन्होंने बताया कि किशोर को मनोरोग विशेषज्ञ के यहां रिफर कर दिया गया है।