हत्या के पीछे पंचायत चुनाव की रंजीश को कारण बताया गया था। तहरीर में देवेंद्र ने बताया था कि अनिल और संजीव के चाचा प्रधान पद के लिए खड़े हुए थे जबकि, विजय वीर की पत्नी जिला पंचायत का चुनाव लड़ी थी। लेकिन दोनों ही हार गए थे। वह अन्य उम्मीदवारों की मदद करने कारण सुरेंद्र से रंजिश रखते थे।
मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने सुरेंद्र के शव को टौंस नदी से बरामद किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना आया था। उसके शरीर में चोट के कई निशान थे। न्यायालय के समक्ष 313 के तहत बयान दर्ज कराते हुए तीनों आरोपियों ने जुर्म कबूल कर लिया था।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता नरेश बहुगुणा ने बताया कि सुनवाई के दौरान कुलदीप शर्मा पुत्र सुरेश शर्मा की मौत हो गई थी। जबकि, पंचकूला में रहने वाले कुलदीप को दोष मुक्त करार दिया जा चुका है।
अनिल राणा, संजीव राणा और विजयवीर : धारा 302 के तहत हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और 25000 रुपये का जुर्माना। धारा 201 के तहत साक्ष्य छिपाने में तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
किरण पाल, अरविंद कुमार, संजय, जितेंद्र, चंदर : साक्ष्य छिपाने के दोष में तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये का आर्थिक दंड। अर्थदंड न देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।