आम बजट में एलआईसी की हिस्सेदारी बेचने के फैसले से देहरादून में कर्मचारियों और अधिकारियों में सख्त नाराजगी है। मंगलवार को उन्होंने एक घंटे तक एलआईसी मंडल कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया। नेहरू कालोनी स्थित एलआईसी मंडल कार्यालय में नेशनल फेडरेशन ऑफ इंश्योरेंस फील्ड वर्कर्स ऑफ इंडिया के आह्वान पर अधिकारी और कर्मचारी एकजुट हुए।
उन्होंने एक घंटे कार्य बहिष्कार करते हुए प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि जल्द सरकार ने अपने फैसले को वापस न लिया तो वह उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे अधिकारियों-कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की इस घोषणा से देशभर के करोड़ों बीमाधारक प्रभावित होंगे।
प्रदर्शन करने वालों में संगठन के विभागीय सचिव जयदीप सिंह बिष्ट, संगठन मंत्री राजीव बिंद्रा, एलआईसी ऑफ इंडिया इंश्योरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन महासचिव नंद लाल शर्मा, अध्यक्ष तन्मय ममगाईं, उपाध्यक्ष पीके गोयल, मनोहर सिंह, मुकेश नौटियाल, गीता जोशी, शशि, वीना, मंजू शर्मा, मदन सिंह पंवार, एके राठौर, राकेश तनेजा, गुरदीप सिंह, राकेश शर्मा, सुनील गुप्ता, मंगल सिंह तोमर, धर्मेंद्र दास, अनूप डोभाल, पंकज आदि मौजूद रहे।
वहीं, सोमवार को विकासनगर स्थित एलआईसी मुख्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों ने कहा कि वर्तमान में भारतीय जीवन बीमा निगम जीवन बीमा निगम देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है। एलआईसी का देश के जीवन बीमा बाजार पर करीब तीन-चौथाई कब्जा है। सरकार का कंपनी की हिस्सेदारी बेचे जाने का फैसला देशहित में नहीं है।
आज यह कंपनी पूंजी के मामले में भारत की सबसे बड़ी वित्तीय कंपनी बन गई है, जो भारतीय स्टेट बैंक को भी पीछे छोड़ चुकी है। एलआईसी की स्थापना 1956 में केंद्र सरकार ने की थी और देश में जीवन बीमा के क्षेत्र में इसकी सबसे ज्यादा बाजार भागीदारी है। एलआईसी की हिस्सेदारी बेचे जाने के बाद लोगों को इश्योरेंस करवाने के लिए अधिक रकम खर्च करनी पड़ेगी। कहा यदि सरकार अपने इस निर्णय को वापस नहीं लेती तो कर्मचारियों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।