देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर को बैंकिंग सुविधा से जोड़ने के मकसद से जिस जन-धन योजना का शुभारंभ किया, वह फ्लॉप होती दिख रही है।
देश के अधिकतर राज्यों में इस योजना के लिए जनता ने काफी संख्या में अपनी भागीदारी दर्ज की, लेकिन उत्तराखंड में प्रधानमंत्री के इस सपने के सामने एक बड़ी समस्या आ गई है।
प्रदेश के करीब 6000 गांवों में अभी भी बैंकिंग सुविधा नहीं है। बैंकों की धीमी रफ्तार के चलते इन गांवों के लोगों को कई बार 20-20 किलोमीटर तक की दूरी नापनी पड़ रही है।
हाल यह है कि 2000 से कम की जनसंख्या वाले करीब दस हजार गांवों में से पिछले तीन साल में केवल चार हजार गांवों को ही बैंकिंग सुविधा मिल पाई है।
रिजर्व बैंक के निर्देश पर प्रदेश में हर परिवार को बैंक खाता उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई थी। जीरो बैलेंस पर बैंकों को खाता खुलवाने का भी कहा गया। लेकिन अब भी कई गांवों में बैंकिंग सुविधा नहीं है।