इस तरह वीरान गांवों के खाली मकानों में अब गुलदारों की बस्ती आबाद हो रही है। जिससे इनकी जनसंख्या भी तेजी से बढ़ने लगी है। प्रति 100 वर्ग किमी में गुलदारों की संख्या 13 तक पहुंच गई है, जिसे वैज्ञानिक काफी बड़ा आंकड़ा मान रहे हैं।
हमले रोकने को बनी टीम
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉॅ.दीपांजन नाहा ने बताया कि गुलदारों के हमले रोकने को रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। इसमें वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के अलावा वन विभाग, पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
वहीं, डॉ.नाहा के मुताबिक पर्वतीय इलाकों में जंगली सूअर व बंदरों द्वारा ग्रामीणों की फसलों को तहस-नहस करने के साथ ही उन पर जानलेवा हमले भी कर रहे हैं, इस पर भी अध्ययन किया जा रहा है।