पांच अक्टूबर को इसी देवकुंडई गांव में गुलदार एक मासूम बच्चे और उसकी बहन पर हमला कर चुका है। दिन के दो बजे 11 वर्षीय राखी रावत अपने छोटे पांच वर्षीय भाई राघव को कंधे पर बैठाकर अपनी मां के साथ खेत से घर लौट रही थी।
तभी घात लगाकर बैठे गुलदार ने भाई पर हमला कर दिया। भाई पर झपटा मारने के बाद बहन राखी रावत ने जान की बाजी लगाकर भाई के ऊपर लेट गई थी। जिसमें गुलदार ने उसे बुरी तरह से घायल कर दिया था। राखी का नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा गया है।
15 अक्टूबर को भी इसी क्षेत्र के कस्याणी गांव में शाम छह बजे चार वर्षीय मासूम शुभम घर की रसोई में अपने परिजनों के साथ बैठा हुआ था। तभी गुलदार रसोई में घुस गया। उसने बच्चे को उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह गुलदार के पंजे में नहीं आ सका, दूसरा हमला करने से पहले परिजनों के हो हल्ले के बाद गुलदार बच्चे को छोड़कर भाग गया। बच्चे को मामूली खंरोच आई थी।
श्रीनगर शहर के डांग मुहल्ले में घर के समीप अस्थायी स्टोर में घुसे गुलदार के शावक को वन विभाग की टीम ने समीप के जंगल में छोड़ दिया। शावक की मां डांग के समीप ही जंगल में घूम रही थी। घटना से भयभीत लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
रविवार सुबह लगभग छह बजे डांग-धोबीघाट मार्ग पर एक घर के पास लोगों ने गुलदार और उसके शावक को घूमते हुए देखा। गुलदार रात भर यहां एक घर के बाहर बने अस्थायी स्टोर रूम में शावक के साथ रही। सुबह होने पर जब गुलदार जंगल की ओर जाने लगी, तो शावक ऊंची दीवार को नहीं फांद पाया और वह स्टोर में ही फंस गया।
स्थानीय निवासी महावीर और कुलदीप ने बताया कि शोर मचाने पर मादा गुलदार जंगल की ओर भाग गई, लेकिन शावक के बस्ती में रहने के वजह से जंगल में ज्यादा दूर नहीं गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इससे पूर्व स्थानीय निवासियों ने शावक को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन भय से वह पीछे हट गए। स्थानीय निवासियों की मदद से वनकर्मियों ने लगभग 15 मिनट की मशक्कत के बाद शावक को फंदे में कैद कर लिया।
यहां से वन कर्मी उसे समीप के जंगल में छोड़ आए। रेंजर अजय लिंगवाल ने बताया कि शावक की उम्र लगभग तीन माह होगी। उसको जंगल में छोड़ दिया गया है। जरूरत पड़ी, तो क्षेत्र में गश्त की जाएगी।