तेंदुए के हमले से एक और मासूम की मौत से क्षेत्रवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने विभाग की लापरवाही को घटना का कारण बताया। कहा कि बार-बार तेंदुए के आतंक के बारे में बताए जाने के बावजूद वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए। नतीजतन, एक और मासूम को जान गंवानी पड़ी।
बच्चे की मौत की खबर सुनकर विधायक चंदन रामदास, जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण भी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए जल्द आदमखोर के आतंक से निजात दिलाने का भरोसा दिलाया।
मृतक करन दो भाइयों में छोटा था। वह सैनिक हाईस्कूल में नर्सरी का छात्र था। माता-पिता मजदूरी कर घर चलाते हैं। घटना के बाद मां रेखा सदमे में है, जबकि बड़े भाई का रो रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने आदमखोर को मार गिराने की मांग की है।
घटना के घंटों बाद भी वनकर्मी मौके से नदारद रहे। एक और मासूम के मारे जाने के घंटों बाद भी वनकर्मियों ने घटनास्थल पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाई। देर शाम सात बजे तक वनकर्मी जिला अस्पताल में मासूम का शव देखने और परिवार को दिलासा देने तक नहीं पहुंचे थे।
इतना ही नहीं, डीएफओ आरके सिंह का भी कुछ अता-पता नहीं था। घटना के डेढ़ घंटे बाद भी वन अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया। विभाग के इस रवैये पर लोगों ने नाराजग जताई। उन्होंने विभाग के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस साल मासूमों की मौत की पांचवीं घटना
इस साल जिले में आदमखोर तेंदुए पांच मासूमों को मौत के घाट उतार चुके हैं। अभी नौ सितंबर को नदीगांव में मासूम बालिका को शिकार बनाने की घटना क्षेत्रवासियों के जेहन में ताजा ही थी कि तेंदुए ने एक और मासूम को मौत के घाट उतार डाला। इससे पहले आदमखोर गरुड़ के सलखन्यारी में एक जबकि हरिनगरी में दो मासूमों को मार चुका है।
हाल ही में विभाग ने नदीगांव के आदमखोर को मार गिराने का दावा किया था। इसके बावजूद एक और हमले से वन विभाग के दावों पर सवाल उठे हैं। क्षेत्र में एक से अधिक आदमखोरों की मौजूदगी की आशंका जताई जा रही है।