न्यायालय ने यह भी पूछा है कि सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में किताबें लगाने में मतभेद क्यों हो रहा है। प्रदेश सरकार ने केवल सीबीएसई से संचालित स्कूलों में ही इन किताबों को लगाने का आदेश जारी किया था।
इस संबंध में दायर याचिका में कहा गया कि सरकार ने 23 अगस्त 2017 को एक शासनादेश जारी कर निजी स्कूलों (आइसीएसई को छोड़कर) में एनसीआरटीई की ही किताबें लागू करने का शासनादेश जारी किया था और निजी प्रकाशक की किताबों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया।
सरकार ने इसका मुख्य कारण निजी विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की ही किताबें महंगे दामों पर बेचने और इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त भार पड़ने की बात कही थी। याचिका के जरिये सरकार के इसी आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त करने की मांग की गई। स्कूलों की हड़ताल को लेकर एक अन्य याचिकाएं भी इस समय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इस याचिका पर सुनवाई बुधवार को होनी है।