अगर इंसान के मन में कुछ करने का जज्बा हो तो हर मंजिल आसान हो जाती है। एक ओर पहाड़ में दो जून की आस में शहर की ओर पलायन को मजबूर हैं, वहीं पिलखोली निवासी वीरेंद्र ने पहाड़ में लघु उद्योग स्थापित कर अपना गांव छोड़कर जा रहे लोगों को एक नई राह दिखाई है। पहाड़ प्रेम के कारण उन्होंने दुबई की नौकरी तक छोड़ दी।
वीरेंद्र ने जिला उद्योग अल्मोड़ा से पांच लाख रुपये का ऋण लेकर छड़ा, खैरना में किराये पर एक दुकान ली। नवंबर 2017 में कागज से गिलास और प्लेट बनाने वाली दो मशीनें स्थापित कीं। इनकी कीमत 9 लाख रुपये है। अन्नपूर्णा इंटरप्राइजेज नाम से शुरू किए गए लघु उद्योग के लिए उन्होंने चार लाख रुपयों की व्यवस्था अपने परिचितों की मदद और अपनी जमा पूंजी से की।
शुरुआत में उन्होंने अपने उत्पाद गरमपानी बाजार में बेचने शुरू किए। धीरे-धीरे भवाली, रानीखेत, अल्मोड़ा में अपने उत्पाद बेचकर 60 हजार रुपये प्रति माह कमा रहे हैं। उन्होंने तीन अन्य लोगों भी रोजगार दिया है। सभी खर्चे काटकर 10 से 15 हजार रुपये अपने लिए बचा लेते हैं। वीरेंद्र ने बताया कि वे मूलरूप से पिलखोली, रानीखेत के रहने वाले हैं। दिल्ली आईटी कंपनी में काम करने के बाद पांच साल दुबई में आईटी कंपनी में नौकरी की। लेकिन, पहाड़ प्रेम और माता-पिता की देखभाल के लिए उन्होंने नौकरी छोड़कर घर आने का फैसला किया।