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देहरादून: अग्नि सुरक्षा की अनदेखी करने वाले स्कूल संचालकों पर होगा मुकदमा, जारी होंगे नोटिस 

Wed, 05 Feb 2020 03:21 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • डीआईजी अरुण मोहन जोशी बुधवार से स्कूल संचालकों को जारी करेंगे नोटिस
  • 15 दिन की मोहलत के बाद पुलिस स्कूलों में जाकर करेगी चेकिंग
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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राजधानी में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था ना रखने वाले स्कूल संचालकाें पर कार्रवाई की तैयारी में है। इसी कड़ी में डीआईजी अरुण मोहन जोशी की तरफ से बुधवार से स्कूल संचालकाें को नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस में निर्धारित मानकों का पालन करने को 15 दिन की मोहलत दी जाएगी।

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डीआईजी अरुण मोहन जोशी के निर्देश पर एसपी सिटी श्वेता चौबे ने उत्तराखंड बिल्डिंग बायलॉज को लेकर स्कूल संचालकों के लिए गाइड लाइन तैयार की है। डीआईजी जोशी ने मंगलवार को इस गाइड लाइन को अंतिम रूप दिया। इसमें अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से लेना होगा, ताकि स्कूलाें में अग्निकांड की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज किया सके।

उदाहरण के तौर पर 15 मीटर की ऊंचाई से कम वाले स्कूल भवनों में प्रति 100 वर्ग मीटर पर एक फायर एक्सटिंग्युशर जरूरी लगाना होगा। 30 मीटर दूरी पर फर्स्ट एंड होजरील लगा होगा। यदि बेसमेंट ऐरिया 200 वर्ग मीटर से अधिक है कम से कम 10 हजार लीटर की क्षमता वाला पानी टैंक रखना आवश्यक होगा। 
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दरअसल उत्तराखंड में फायर नियमावली न होने के कारण अग्निशमन विभाग को नोटिस के अलावा सीधे तौर पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसी लिहाज से पुलिस उत्तराखंड बिल्डिंग बायलॉज की गाइड लाइन के सहारे अग्नि सुरक्षा व्यवस्था न करने वाले स्कूल संचालकाें पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है। मंगलवार को शहर के तमाम बडे़ स्कूलाें की सूची तैयार की गई है।

डीआईजी अरुण मोहन जोशी बुधवार को इन स्कूल संचालकाें को नोटिस जारी करेंगे। इनमें फायर उपकरणों की व्यवस्था लागू करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। दो पेज के इस नोटिस में स्कूल संचालकाें को आईपीसी और अन्य एक्ट में होने वाली कार्रवाई के बारे में बताया गया है। इसके बाद पुलिस चेकिंग में नियमाें की अनदेखी मिलने पर संबंधित के खिलाफ आईपीसी और अन्य एक्ट के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। 

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स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने की कवायद

पुलिस स्कूल प्रबंध तंत्र की जवाबदेही तय करने की तैयारी में है। कई माह की कोशिश के बाद स्कूल संचालकाें के लिए 60 पेज की एसओपी तैयार हुई है, जिसमें स्कूल संचालकाें को नशा, ट्रैफिक, फायर, यौन शोषण से जुड़े मामलों में क्या करना और क्या नहीं। साथ ही यह बताया गया है कि अपराध छिपाने पर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है।  

 देहरादून जिले की कमान संभालने के तुरंत बाद डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने स्कूलों की जवाबदेही तय करने को लेकर एसओपी बनाने के निर्देश दिए थे। उत्तराखंड के अलावा दिल्ली आदि राज्यों के शिक्षा, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा चिकित्सकाें आदि से बात की।

पांच माह के प्रयासों के बाद 60 पेज की एसओपी तैयार हुई है, जो अंग्रेजी में है। एसओपी में नशा, ट्रैफिक, फायर, छेड़छाड़ और यौन शोषण से जुड़े मामलों में स्कूल संचालकों को क्या करना है और क्या नहीं, यह विस्तार से बताया गया है। सूत्राें का कहना है कि एक दो दिन में पुलिस इस एसओपी का विमोचन करा सकती है।
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