उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिसेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि वकालत व राजनीति में क्या नहीं करना है, ये जरूर सीखना चाहिए। वह मंगलवार को उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधि पेशा जॉब नहीं बल्कि एक सम्मान है।
प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना को विजेता घोषित किया जबकि जीएच रायसनी लॉ स्कूल, नागपुर को उपविजेता घोषित किया गया। इसके अलावा गर्वमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई की स्वरूपनी श्रीनाथ सर्वश्रेष्ठ महिला अधिवक्ता एवं बाहरा यूनिवर्सिटी शिमला हिल्स, हिमाचल प्रदेश के प्रणव कौशल को सर्वश्रेष्ठ पुरुष अधिवक्ता घोषित किया गया। सिमबाइसिस लॉ स्कूल हैदराबाद को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल एवं लॉ सेंटर-2, फैकल्टी ऑफ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी की एस शर्मा को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के खिताब से नवाजा गया। विजेताओं को 60 हजार का नगद पुरस्कार व शिल्ड दी गई।
इससे पहले न्यायमूर्ति बिसेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि हर सफल अधिवक्ता में एक अतिविशिष्ट गुण होता है। उसे पहचानना, ग्रहण करना एवं अपने आचरण में उतारना विधि के छात्र के लिए सफलता का गुरुमंत्र है। कहा कि एक वकील का कोर्ट में जरूरत से ज्यादा व अनावश्यक बोलना सबसे हानिकारक है। हर न्यायाधीश बिना बोले आपको सुनता है एवं आपके आचरण को देखता है। उन्होंने कहा कि विधि पेशा विशेषकर न्यायाधीश कोई नौकरी मात्र नहीं बल्कि एक सम्मान है।
कार्यक्रम संयोजिका डॉ. पूनम रावत ने बताया कि प्रतियोगिता में देश के विभिन्न महाविद्यालयों की 80 टीमों ने हिस्सा लिया है। जबकि आयोजकों ने 32 टीमों को प्रारंभिक मुकाबले के लिए चुना। प्रतियोगिता में कॉलेज में 27 न्यायालयों का गठन किया गया। 57 निर्णायकों ने जज की भूमिका निभाई।
इस दौरान विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके शाली, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. रोमेश गौतम, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विवेक नारायण शर्मा एवं लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा बतौर न्यायाधीश उपस्थित थे। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी, अंजुम परवेज, डॉ. अनिल दीक्षित, डॉ. एलएस रावत, डॉ. विजय श्रीवास्तव, उज्ज्वल कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।