नृत्य सम्राट उदयशंकर ने ‘दैय्या रे दैय्या’ में पहाड़ी घसियारी नृत्य के कुछ अंश शामिल कराए थे। प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. अजय रावत की पुस्तक कल्चरल हिस्ट्री ऑफ उतराखंड में इस बात का उल्लेख किया गया है।
दैय्या रे दैय्या नृत्य की कॉस्ट्यूम डिजाइन वैजयंती माला की मां ने की थी। नृत्य में कुमाऊंनी स्टाइल के चांदी के गहने प्रयुक्त किए गए थे, जो खुद वैजयंती माला के थे। बाद में प्रसिद्ध कोरियोग्राफर बनीं सरोज खान तब इस गाने में बैकग्राउंड डांसर रही थीं। इस फिल्म पर आधारित कई अन्य फिल्में कुदरत, बीस साल बाद, और ओम शांति ओम भी बनीं।
लता मंगेशकर ने 1990 में प्रदर्शित गढ़वाली फिल्म रैबार के ‘मन भरमेगे मेरु सुध बुध ख्वे गे..’ गीत को अपनी आवाज दी थी। देवी प्रसाद सेमवाल के लिखे गीत की धुन कुंवर सिंह बावला ने बनाई थी, फिल्म का निर्देशन अनुज जोशी ने किया था। लता ने गीत के एक-एक शब्द का अर्थ व उच्चारण गहराई से समझा और फिर इसे हूबहू गढ़वाली अंदाज में गाकर अमर कर दिया था।