फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतिम दिन 'भगवान' हुए लापरवाह

Wed, 25 Sep 2013 12:32 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
आठ दिनों से चल रही नर्सों की हड़ताल के दौरान मरीजों को सबसे ज्यादा तकलीफ हड़ताल के लास्ट दिन हुई।
विज्ञापन


मंगलवार को नर्सों ने सुबह की शिफ्ट में काम करने के बाद हड़ताल के स्थगन की घोषणा कर दी थी। दोपहर दो से रात की आठ बजे के बीच की शिफ्ट से काम शुरू करने के बजाए नर्स रात की शिफ्ट में आईं।

पढ़ें, मौसमी बुखार से दो की मौत, 50 बीमार

शाम के छह बजे दून अस्पताल के इमरजेंसी गेट से बनियावाला, गोरखपुर के रहने वाले दयाराम दाखिल हुए। उनका हाथ लहूलुहान था। खून बेड से नीचे फर्श पर टपक रहा था। दयाराम का भतीजा राजेंद्र कभी नर्सों के कमरे और कभी ईएमओ की तरफ देखकर चीख रहा था।
विज्ञापन


कुछ देर के बाद एक इंटर्न आया। उसने दयाराम को देखकर कहा कि जाओ रुई उठा लाओ। तब तक खून बहता रहा। दयाराम के हाथ से वीगो निकल गई थी। रुई लाने के बाद इंटर्न ने वीगो में पाइप लगा दिया।

पढ़ें, हरिद्वार में फैल रहा डेंगू डंक, पांच की मौत

इस बीच की शिफ्ट के छह घंटे में मरीजों के साथ अधिक लापरवाही हुई। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी हड़ताल स्थगन से लापरवाह हो गए। उन्होंने इस शिफ्ट में वार्डों और इमरजेंसी में राउंड नहीं लिया। इंटर्न भी ढीले हो गए। विनोद कुमार रोगी को न देखे जाने के संबंध में ईएमओ एचएस भाटिया से इमरजेंसी में आकर शिकायत करता रहा।
विज्ञापन


नेहरू कालोनी के राजेश बिष्ट ने बताया कि रोगियों की ग्लूकोज की बोतल खत्म हो जाने पर कोई बदलने वाला नहीं था। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक आरएस असवाल से पूछा कि क्या नर्सें काम पर आ गई हैं? वह बोले कि सूचना नहीं है। बात तो हो ही गई थी, अभी बाहर आ गया था।

फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें