फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसून सत्र के अटपटे-चटपटे किस्से

Fri, 20 Sep 2013 11:19 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
यूं तो तीन दिन चले मानसून सत्र में विधानसभा के भीतर हर दिन ही कुछ न कुछ ऐसा घटता रहा जिससे कभी माहौल तल्ख तो कभी हास्यास्पद हो गया, लेकिन आपको बताते हैं आखिरी दिन के कुछ अटपटे लेकिन चटपटे किस्से।
विज्ञापन


कांग्रेस में हर तीसरा विधायक नेता सदन
तीन दिन केविधानसभा सत्र में कांग्रेस के हर तीसरे विधायक ने खुद को नेता सदन से कम नहीं समझा। नेता प्रतिपक्ष जैसे ही बोलने के लिए खड़े होते तो कोई भी विधायक जवाब देने लगता।

पढ़ें, महामहिम को खुश करने के लिए किया गजब काम!

पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व मंत्री मदन कौशिक व पूर्व स्पीकर हरबंश कपूर जैसे वरिष्ठ सदस्यों के प्रति भी इन कांग्रेसी विधायकों का यही रवैया रहा।
विज्ञापन


शुक्रवार को इस बात से झल्लाए नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर से नाराजगी व्यक्त की और पूछा कि पहले यह तय हो जाए कि नेता सदन कौन है। मजे की बात यह थी कि जब भी कांग्रेसी कोई विधायक विपक्ष का जवाब देने लगता था तो उसे ट्रेजरी बेंच से भी कोई हिदायत या नसीहत नहीं मिलती थी।

पढ़ें, बेचारे नेताजीः इनके लिए भी डीएम साहब ही हैं!

जब नेता प्रतिपक्ष बने स्पीकर
शुक्रवार को सदन में अजीब नजारा पेश आया। यह हद पार होने जैसी बात भी थी। सत्र का समय नहीं बढ़ता देख नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने खुद ही स्पीकर केकर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सत्र की अवधि बढ़ाए जाने का प्रस्ताव लाकर मत विभाजन करा दिया।

पढ़ें, भारत के गांव में नेपाल के सिम पर ट्रिन-ट्रिन

हुआ यूं कि सरकार अवधि बढ़ाने को तैयार नहीं थी। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं सत्र की अवधि तीन दिन बढ़ाने का प्रस्ताव रखता हूं। जो सदस्य इसके पक्ष में हो हां कहे और जो विपक्ष में हो ना कहे। इस पर विपक्षियों ने तो एकसुर में हां कहा लेकिन शेष किसी सदस्य ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की।

इसे लेकर सत्तापक्ष के सदस्य भड़क गए और नेता प्रतिपक्ष पर स्पीकर के दायित्वों का निर्वहन करने का आरोप लगाने लगे। बड़ी मुश्किल से मामला शांत हुआ।

पढ़ें, बड़ी खबरः चैंपियन ने किया सरेंडर, जमानत भी मिली

सिर मुंडाते ही पड़ गए ओले
नियम कानूनों की बात पर सदन के भीतर जिरह हो रही थी। तभी नेता प्रतिपक्ष की बगल में बैठे डिप्टी स्पीकर अनुसूइयां प्रसाद मैखुरी किताब खोल कर खड़े हो गए और सदन को समझाने लगे।

इसी बीच नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि अब सवाल यह है कि पीठ किसे माना जाए। जब स्पीकर है तो डिप्टी स्पीकर की राय क्यों मानी जाएगी।

पढ़ें, यूकेडी (पी) के अजब-गजब नारों का दुबई कनेक्शन

यह कोई ग्राम सभा की बैठक तो है नहीं, कि पत्नी नहीं है तो बैठक में पति आ गया। इतना सुनते ही मैखुरी ने सीट ग्रहण करने में एक मिनट की देरी नहीं की।

भाजपा का पावर गेम
इस बार सुव्यवस्थित सदन में भाजपा का पावर गेम भी देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम निशंक के बीच तल्खी कई बार देखने को मिली।

पढ़ें, तैयार रहिए...बदरीनाथ अब दूर नहीं!

एक बार तो नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने सार्वजनिक रूप से पूछ लिया कि निशंक जी यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं अपनी बात पूरी करुं।

इस पर सत्तापक्ष ने मजे लिए और कहा कि सदन के भीतर केवल स्पीकर से आज्ञा ली जाती है। इतना होते ही विपक्ष की स्थिति देखने लायक थी। इससे पहले भी निशंक ने अजय भट्ट को एक मामले में टोका।
विज्ञापन


निशंक ने कहा अजय भट्ट उनके नेता
पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मीडिया के सवालों पर सफाई दी कि उनके और नेता प्रतिपक्ष के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है।

भट्ट नेता प्रतिपक्ष हैं और वे एवं अन्य भाजपा विधायक उनके पीछे हैं। दरअसल, शुक्रवार को सदन में सुबह से ही भट्ट और निशंक में कई मुद्दों पर होड़ नजर आई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें