कांवड़ मेले के अंतिम दिन भी शिवभक्तों ने खूब जोर लगाया। बुधवार दोपहर बाद तक भी बाइक सवार कांवड़िए की हाईवे पर दौड़ जारी रही। शाम के आसपास के क्षेत्रों से आने वाले कांवड़िए जल लेकर जाते दिखाई दिए।
12 दिनों से चल रहा कांवड़ मेले का उल्लास बुधवार को जलाभिषेक के साथ थम गया। माना जा रहा था कि बुधवार की सुबह हाईवे शिवभक्तों से खाली हो जाएंगी, लेकिन शिवभक्तों का रैला बुधवार को भी जारी रहा।
सुबह हरिद्वार से जल भरकर आने वाले कांवड़िए के चार पहिया वाहन तो सड़कों पर दौड़ ही रहे थे, बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन सवार कांवड़िए की भी भारी भीड़ रही। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक कांवड़ियों का रैला चलता रहा। इसके बाद भीड़ छंटने लगी थी।
हालांकि इसके बाद भी काफी इक्का-दुक्का कांवड़िए आते रहे। आसपास के गांवों के रहने वाले कांवड़िए शाम तक आते रहे।
जल जढ़ाने को शिवालयों में उमड़े शिवभक्त
हरिद्वार के पौराणिक शिवालयों में लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। हजारों कांवडिय़ों ने गंगाजल भरकर इन्हीं मंदिरों में कांवड़ चढ़ा दी। 12 दिनों से खचाखच भरी धर्मनगरी शाम को खाली नजर आई।
हमेशा की भांति कनखल के पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर में रात दो बजे से भक्तों की कतारें लग गई थीं। अनेक कांवड़िए भी कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतिक्षा कर रहे थे। आसपास के जनपदों से आए अनेक कांवडिय़ों ने इसी मंदिर में जल चढ़ा दिया। जो श्रद्धालु महीने भर श्रावण स्नान करते हुए हैं, उन्होंने दक्षेश्वर मंदिर में जलाभिषेक किया।
इस भांति दरिद्रभंजन, दुखभंजन तिलभंडेश्वर, जनवासा, नीलेश्वर, गौरीशंकर, बिल्वकेश्वर, समुद्रेश्वर, उदयेश्वर, जलेश्वर, जटिलेश्वर आदि मंदिरों में भी शिव भक्त त्रयोदशी पूजन कर रहे थे। सायंकाल जब त्रयोदशी और चतुर्दशी के मिलन का मुहूर्तकाल आया, तब एक बार फिर से श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे। कांवड़ मेले की भीड़ धर्मनगरी में शाम को ढली नजर आई। रात भर और सवेरे से डाक वाहनों की वापसी जारी रही।