उत्तराखंड सरकार ने वरुणावत ट्रीटमेंट की कवायद शुरू कर दी है। उत्तरकाशी पहुंची जीएसआई की टीम ने वरुणावत शीर्ष पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने फिलहाल भूस्खलन से नगर की आबादी को किसी तरह का खतरा न होने की बात कही। मौके पर मौजूद रहे गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण ने कहा कि भूस्खलन को रोकने के लिए तात्कालिक एवं दीर्घकालिक उपाय किए जाएंगे।
वरुणावत के तांबाखानी वाले छोर पर वर्षों से सक्रिय भूस्खलन अब शीर्ष तक पहुंचने से पूर्व में हुए करोड़ों के ट्रीटमेंट कार्य तथा नीचे तलहटी में नगर पर खतरा मंडराने लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जीएसआई की तीन सदस्यीय टीम मंगलवार को उत्तरकाशी पहुंची। उनके साथ टीएचडीसी एवं मैकाफेरी कंपनी के प्रतिनिधि भी निरीक्षण पर आए हैं।
टीम ने वरुणावत शीर्ष पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पूर्व में हुआ ट्रीटमेंट फेल होने के कारण, इसे दुरुस्त करने के उपाय तथा नीचे आबादी पर मंडरा रहे खतरे की पड़ताल की। टीम दो दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी।
टीम के साथ मौजूद रहे गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण ने कहा कि पूर्व में हुए ट्रीटमेंट में कुछ कार्य अधूरे छोड़ने की वजह से यह स्थिति आई है। इसकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पहली प्राथमिकता ट्रीटमेंट को दुरुस्त कर आबादी की सुरक्षा है।
इसके लिए भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट मिलते ही तात्कालिक और दीर्घकालिक योजना बनाकर काम किया जाएगा। इस मौके पर जीएसआई के वरिष्ठ भूवैज्ञानिक एपी थपलियाल, एस दास एवं डीएस चंद, टीएचडीसी के डीजीएम जीएस रावत, एसडीएम हरगिरी, ईई लोनिवि अशोक कुमार, सिंचाई विभाग के ईई पीएस पंवार, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल तथा मैकाफेरी कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
वरुणावत के तांबाखानी वाले छोर से हो रहे भूस्खलन का निरीक्षण कर लिया है। अन्य विशेषज्ञों से बातचीत के बाद ही इसके ट्रीटमेंट के लिए रिपोर्ट दी जाएगी। पूर्व में इस हिस्से में बाहर से ट्रीटमेंट की स्थिति न बनने पर ही सुरंग का निर्माण कराया गया था। फिलहाल भूस्खलन से नीचे शहर की आबादी को कोई खतरा नहीं है।
- एपी थपलियाल, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक जीएसआई
वरुणावत ट्रीटमेंट के दौरान तांबाखानी वाले छोर पर ही पानी छोड़ने का प्लान किया गया था। उस समय निगरानी समिति बनाकर ट्रीटमेंट कार्य पर नजर रखने का निर्णय लिया गया था। ताकि किसी भी बदलाव या हलचल का पता लगने पर अग्रिम कार्रवाई की जा सके। तांबाखानी वाला भूस्खलन शीर्ष तक पहुंचने से पहले ही इसकी सूचना मिली होती, तो समय रहते इसे रोका जा सकता था।
- जीएस रावत, डीजीएम टीएचडीसी