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उत्तराखंड: दो गांवों में प्रकृति ने बरपाया कहर, मच गई तबाही, बेघर हुए लोग

Mon, 12 Mar 2018 01:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागेश्वर
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landslide
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अति संवेदनशील गांवों की सूची में शामिल कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में बिना बारिश के ही जबरदस्त भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशाल चट्टानें और पेड़ उखड़कर खाई में समा गए। वहीं देवाल ब्लाक का दूरस्थ गांव झलिया भूस्खलन की चपेट में आ गया। यहां पहाड़ी से शनिवार रात को भूस्खलन होने से गांव के 20 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ छानियों में शरण ली।

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 कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में जबरदस्त भूस्खलन के अफरातफरी मच गई। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। तहसील प्रशासन ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी है। तहसील मुख्यालय से लगभग 95 किमी की दूरी पर स्थित कुंवारी गांव की पहाड़ी में शनिवार की शाम 7.30 बजे एकाएक भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशालकाय बोल्डर और पेड़ों के गिरने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से बाहर निकल आए।

पूरा गांव रात भर दहशत में रहा। सुबह होने पर गांव के एक व्यक्ति ने घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दी। गांव में भूस्खलन की सूचना पर कपकोट के उपजिलाधिकारी रवींद्र सिंह बिष्ट ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी। जिस क्षेत्र में भूस्खलन हुआ है उस हिस्से के खतरे में आने के कारण वहां से पहले ही सभी परिवारों को गांव के दूसरे सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जा चुका है। 
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अति संवेदनशील गांवों में शामिल है कुंवारी
जिले का कुंवारी गांव अतिसंवेदनशील गांवों की सूची में शामिल है। इस गांव में लगभग 64 परिवार रहते हैं। एक दशक पूर्व से इस गांव में जबरदस्त भूस्खलन हो रहा है। गांव के आगे से जमीन दरकने और पीछे की पहाड़ी से लगातार भूस्खलन के कारण वर्ष 2014 में गांव को पूरी तरह से दूसरे सुरक्षित भाग में विस्थापित कर दिया गया। इसके लिए गांव के प्रत्येक परिवार को धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। कुंवारी गांव उत्तराखंड राज्य में पूर्ण विस्थापित होने वाला पहला गांव है।

भूस्खलन की सूचना के बाद एसडीआरएफ की टीम क्षेत्र में भेज दी है। गांव के जिस क्षेत्र में पहले घर थे वहां पर भूस्खलन की सूचना है। इस समय सभी पुनर्वासित परिवार दूसरे क्षेत्र में रहते हैं। एक-दो दिन के भीतर भू वैज्ञानिकों के साथ क्षेत्र में जाकर जांच की जाएगी।
- आरएस बिष्ट, एसडीएम, कपकोट

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झलिया गांव में भूस्खलन, दो घरों में घुसा मलबा

landslide - फोटो : amarujala file photos
गढ़वाल में देवाल ब्लाक का दूरस्थ गांव झलिया भूस्खलन की चपेट में आ गया। यहां पहाड़ी से शनिवार रात को भूस्खलन होने से गांव के 20 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ छानियों में शरण ली। ग्रामीणों की सूचना पर तहसील प्रशासन ने कर्मियों की टीम झलिया के लिए रवाना कर दी।

जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह दानू ने बताया कि वर्ष 2013 से झलिया गांव के पास की पहाड़ी पर भूस्खलन से कई मकानों में दरारें आ गई थीं। तब से ग्रामीण लगातार गांव को विस्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की मांग नहीं सुनी गई। उन्होंने बताया कि शनिवार रात को करीब 10 बजे पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा गिरा और बलवंत सिंह और खीम के घरों में घुस गया। दोनों घरों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही भूस्खलन से कई मकानों में दरारें भी हैं।

घरों में मलबा घुसने से गांव के सभी 20 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ करीब एक किमी दूर लेटीखाल तोक में बनी छानियों में शरण ली। जिला पंचायत सदस्य दानू ने बताया कि गांव में नुकसान की जानकारी और खतरे को देखते हुए प्रशासन को सूचना दे दी गई है। साथ ही प्रशासन से प्रभावितों की मदद करने की मांग की गई है। दूसरी ओर तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल ने बताया कि नायब तहसीलदार के नेतृत्व में कर्मियों की टीम झलिया के लिए रवाना कर दी गई है। गांव सड़क से 20 किमी पैदल होने की वजह से वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पा रहा है।
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