बारिश के समय भूस्खलन की समस्या अधिक
कार्यशाला में जीएसआई उप महानिदेशक संजीव कुमार व डॉ. हरीश बहुगुणा ने भी जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने कहा कि अधिकांश भूस्खलन की घटनाएं बारिश के समय होती हैं। बारिश ट्रिगर का काम करता है। डॉ. बहुगणा ने कहा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम के बेहतर परिणाम आ रहे हैं। अगर रियल टाइम डेटा होता है तो पूर्वानुमान जारी करने में काफी मदद मिलती है। उन्होंने राज्य में भूस्खलन सबसे अधिक चमोली जिले में होता है। इसके अलावा बागेश्वर में काफी घटनाएं होती हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में आल वेदर स्टेशन हैं उससे कवर होने वाले एरिया और कितने आल वेदर स्टेशन की जरूरत है, उसके बारे में जानकारी दी। इससे पूर्व उद्घाटन सत्र को कुलपति सुरेखा डंगवाल ने संबोधित किया। कार्यशाला की अध्यक्षता जीएसआई के अपर महानिदेशक राजेंद्र कुमार ने की। इस दौरान उप महानिदेशक डॉ. सीडी. सिंह, भू-वैज्ञानिक देवेंद्र सिंह के अलावा वाडिया संस्थान, सीबीआरआई समेत 28 संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।
जीएसआई व आपदा प्रबंधन विभाग में हुआ एमओयू भी
कार्यशाला में जीएसआई व आपदा प्रबंधन विभाग में एमओयू हुआ। सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि एमओयू होने पर अध्ययन, सूचनाओं को साझा करने में सुगमता होगी।