आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से पूछा कि क्या सत्यापन की कार्रवाई के दौरान मकान मालिक द्वारा किए गए सत्यापन आवेदनों का कोई रिकार्ड नहीं होता। पुलिस की तरफ से जवाब दिया कि थाने के रजिस्टर मुहल्लों में ले जाकर यह चेक करना संभव नहीं हैं। आयोग के मुख्य आयुक्त आलोक कुमार जैन ने इस मामले में एक अक्तूबर को डीजीपी को पत्र लिखकर असंतोष जताया।
लिखा गया कि किराएदारों का सत्यापन कराने के बावजूद मकान मालिकों का चालान करना न्यायोचित नहीं है। ऐसे में पहले आवेदन के रिकार्ड से उसका मिलान होना चाहिए। भविष्य में सत्यापन कराने वालों का चालान न काटा जाए।
आयोग के सचिव पंकज नैथानी ने बताया कि आयोग के पत्र का संज्ञान लेकर पुलिस महानिदेशक ने पुलिस कप्तानों को मकान मालिक का चालान करने से पहले नोटिस देने के निर्देश दिए है। चालान से पहले यह सत्यापित करा लिया जाए कि मालिक ने पूर्व में किराएदार अथवा नौकर को सत्यापन तो नहीं करा रखा। साथ ही मकान मालिक की उपस्थिति के बिना चालान की कार्रवाई किसी भी दशा में ना की जाए।