देहरादून में विवादित भूखंड रियल इस्टेट में पैसा लगाने वाली कंपनियों की पहली पसंद हैं।
कुबेर प्लांटर्स का मामला उजागर होने के बाद नकरौंदा में ऐसी ही तीन कंपनियां और सामने आई हैं, जिन्होंने विवादित भूखंडों में पैसा निवेश किया है। इन कंपनियों पर भी कुबेर की तरह फर्जीवाड़ा करने का शक है। इनकी अंदरखाने जांच हो रही है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद आदि जगहों की कंपनियों के लिए शहर के कुछ भूमाफिया, प्रापर्टी डीलर ‘मुखबिरों’ का काम कर रहे हैं। ये कंपनियों को भूखंडों के संबंध में जानकारी देने के साथ नफा-नुकसान भी बताते हैं।
‘मुखबिरों’ का कमीशन रहता है तय
इनके पास विवादित भूखंडों की फेहरिस्त रहती है। उसी आधार पर ‘मुखबिरों’ का कमीशन तय रहता है। यही लोग अधिकारियों को भी संबंधित भूखंडों में फर्जीवाड़े की खबर देते हैं।
अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भूखंडों को विवादित बनाने की शुरुआत छुटभैये भूमाफिया करते हैं। पहले ये भूखंडों पर हक जमाते हैं। इसके बाद लड़ाई-झगड़ा मुकदमेबाजी होने लगती है। फिर कंपनी उस भूखंड का मोलतोल कर लेती है।
यही तरीका कुबेर प्लांटर्स के केस में भी अपनाया गया था। माफिया पूरे मकड़जाल में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल कर देते हैं।
सूत्रों का कहना है कि नकरौंदा और आसपास के विवादित भूखंडों पर जिन दूसरी कंपनियों ने पैसा लगाया है उनके कागजात में भी फर्जीवाड़ा है। कई जगह फर्जी दस्तखत हैं।
कुबेर की तरह दूसरी कंपनियों ने भी विवादित भूखंड हथियाने के बाद उनकी प्लाटिंग करके बेच दिया। लेकिन मकड़जाल के कुछ घटकों के असंतुष्ट होने के कारण सुगबुगाहट पैदा हो गई है।
कुबेर प्रकरण में पुलिस ने शुरू की जांच
नकरौंदा में कुबेर भूमि खरीद प्रकरण में डोईवाला पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शनिवार को मामले की जांच के लिए पुलिस तहसील आई। पुलिस ने बयान लेने के साथ ही कागजात की भी छानबीन की। पुलिस की जांच कार्रवाई के कारण पूरे दिन तहसील में गहमागहमी रही।
तहसीलदार गुरदीप सिंह ने नकरौंदा प्रकरण में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। कोतवाली से मामला डोईवाला पुलिस को सौंप दिया गया। शनिवार को पहले दिन डोईवाला पुलिस तहसील पहुंची।
पुलिस ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार और दूसरे कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। साथ ही पुलिस ने कुछ कागजात भी मांगे।