लक्ष्य को बैडमिंटन विरासत में मिली है। लक्ष्य ने अपने दादा, पिता तथा बड़े भाई चिराग को बैडमिंटन खेलते देखकर कम उम्र में ही कोर्ट में जाना शुरू कर दिया था। उनके दादा स्व. सीएल सेन वैटरन में राष्ट्रीय स्तर के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। पिता डीके सेन भारतीय खेल प्राधिकरण के पूर्व कोच और अंतरराष्ट्रीय वैटरन बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं। वह प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी बंगलूरू में प्रशिक्षण दे रहे हैं। लक्ष्य के बड़े भाई चिराग भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
2009 में ही बन गए थे चैंपियन
वर्ष 2009 में गुंटूर (आंध्र प्रदेश) में आयोजित सब जूनियर नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर 10 आयु वर्ग में लक्ष्य चैंपियन बन गए थे। 2010 में चंडीगढ़ में आयोजित ऑल इंडिया सब जूनियर रैंकिंग टूर्नामेंट में खेलते समय प्रकाश पादुकोण की नजर उन पर पड़ी। उनके खेल से प्रभावित होकर उन्होंने लक्ष्य को अपनी अकादमी बंगलूरू में प्रशिक्षण के लिए बुलाया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह अंडर-13, अंडर-17 आयु वर्ग के साथ ही जूनियर वर्ग में भी नेशनल चैंपियन रहे हैं।
2017 में विश्व जूनियर नंबर एक बन चुके हैं
लक्ष्य 2017 में विश्व जूनियर नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं। 2016 में उनके बड़े भाई चिराग भी विश्व जूनियर नंबर दो रह चुके हैं। 2018 (जकार्ता) में भारत के गौतम ठक्कर (1965) के बाद लक्ष्य दूसरे जूनियर एशियन चैंपियन बने। 2018 में युवा ओलंपिक (अर्जेंटीना) में रजत पदक, विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं।