इसी बदले की भावना से विनय त्यागी ने तय किया कि वह यह रकम ईडी को दे देगा। इस बात पर डॉक्टर भी रजामंद था। बाद में यह बात किसी तरह ठेकेदार को पता चल गई। ठेकेदार ने डॉक्टर को डराया तो उसने विनय त्यागी पर चोरी के आरोप लगा दिए। सितंबर में उसे चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया। विनय त्यागी की पत्नी को भी धमकाया गया।
आरोप लगाए कि विनय के खिलाफ लक्सर और पुरकाजी में झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। देहरादून जेल से रुड़की जेल शिफ्ट के भी फर्जी कागजात तैयार किए गए। जबकि परिजनों को जेल से शिफ्ट करने के लिए किसी प्रकार का आवेदन नहीं दिया था। दो दिन बाद लक्सर में छोटे मुकदमे में पेशी के दौरान भी सुरक्षा में लापरवाही बरती गई और विनय को रास्ते से हटाने के लिए यह हमला कर दिया गया।