शोध कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक वर्ष 1994 में जहां परीताल झील का क्षेत्रफल 0.08 वर्ग किमी था, वहीं वर्ष 2001 में यह बढ़कर 0.12 वर्ग किमी, वर्ष 2011 में 0.17 वर्ग किमी और वर्ष 2018 में यह बढ़कर 0.21 वर्ग किमी हो गया है।
एनएमएचएस के तहत दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी नई दिल्ली के डॉ. केसी तिवारी की अगुवाई में परीताल झील को लेकर शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने अपने अध्ययन में पाया है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में अलकनंदा रिवर बेसिन में 5584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 17.8 मीटर गहरी परीताल झील में 3754782.09 क्यूबिक मीटर पानी है।
शोध वैज्ञानिकों का मानना है कि परीताल झील का ढलान 10 डिग्री से भी कम होने की वजह से यह भविष्य में बड़ा खतरा साबित हो सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि हाल फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
‘नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज’ के शोध में खुलासा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित परीताल झील का अध्ययन किया गया है। झील का क्षेत्रफल व इसमें पानी की मात्रा साल दर साल बढ़ रही है। वैसे तो फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है। फिर भी सरकारों व आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को सचेत रहने की जरूरत हैं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।
-डॉ. गोपीनाथ रोगांली आरए, शोध वैज्ञानिक