आरोप था कि नाबालिग को सिविल जज ने बंधक बनाकर रखा और उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया। मामले में जिला जज ने सिडकुल हरिद्वार थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद जिला जज की रिपोर्ट के आधार पर ही उच्च न्यायालय ने सिविल जज को निलंबित किया था। शिकायती पत्र के आधार पर मुख्य न्यायाधीश ने जिला जज हरिद्वार को जांच कराने के निर्देश दिए थे। गिरफ्तारी से बचने व प्राथमिकी निरस्त करने की मांग को लेकर सिविल जज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।