किसी व्यक्ति द्वारा कहे कथन और अन्य माध्यम से ली गई सामग्री को शोधग्रंथ में माध्यम सहित पूर्ण रूप से वर्णित, संदर्भित करने पर उरकुंड उसे नियमों के अनुसार साहित्य चोरी नहीं मानता है।
शोधग्रंथ में कम से कम 20 फीसदी तक अवर्णित सामग्री के प्रयोग की अनुमति देने पर भी विचार हो रहा है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सूचना वैज्ञानिक डॉ. युगल जोशी ने बताया कि वेबसाइट से मिली जानकारियों के साथ संबंधित वेबसाइट के लिंक का विवरण देने पर प्रयोग की गई सामग्री मान्य है।
देखा गया है कि शोधार्थी थीसिस लिखते समय ऐसे माध्यमों से भी सामग्री ले लेते हैं जहां उसके लेखक का नाम दर्ज नहीं होता है।
शोध कार्य को लेकर यूजीसी की ओर से मिले सख्त निर्देशों का पालन करते हुए कुमाऊं विवि में उरकुंड को प्रभावी किया जा रहा है। इससे पहले देश के कई बड़े विश्वविद्यालयों ने थीसिस को इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जांचना शुरू कर दिया है।
-प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलपति कुमाऊं विवि
यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक पीएचडी थीसिस की जांच उरकुंड के माध्यम से की जाएगी और उसी के बाद ही थीसिस के मूल्यांकन की कार्रवाई की जाएगी। शोधार्थी को थीसिस के साथ उरकुंड से मिला प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा।
- प्रो. राजीव उपाध्याय, निदेशक शोध कुमाऊं विवि