प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास की कविताओं और गीतों का बृहस्पतिवार दूनवासियों ने खूब आनंद उठाया। कविताओं और गीतों के साथ ही अपने चुटीले अंदाज से डॉ. विश्वास ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। देर रात तक लोग उनकी कविताओं का लुत्फ लेते रहे।
बृहस्पतिवार शाम बन्नू स्कूल मैदान में डॉ. कुमार विश्वास की संगीतमय शाम फिर मेरी याद.. नाम से आयोजित की गई। उन्होंने अपने खास अंदाज में दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उत्तराखंड के राजनीतिक हालातों पर भी उन्होंने जमकर चुटकी ली। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग पर उन्होंने वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है, वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है, किसी से अपने दिल की बात तू कहना न भूले से, यहां खत भी जरा सी देर में अख़बार होता है.. पंक्तियों के जरिए चुटकी ली।
सुनाई मशहूर कविताएं
उन्होंने कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है, पनाहो में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना, किसी पत्थर की मूरत है कोई पत्थर की मूरत है, किसी के दिल की मायूसी जहां से हो के गुजरी है, भंवर में सफीना ले के हम पतवार बैठे हैं, मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है, कोई कब तक महज सोचे कोई कब तक महज गाए, कि हर एक नदियां के होंठों पर समंदर का तराना है और वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है..जैसी पंक्तियां सुनाकर खूब तालियां बटोरी। उन्होंने बस अभी-अभी एक गीत रचा है तुमको जीते-जीते, अभी-अभी अमृत छलका है अमृत पीते-पीते गीत सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अंत में उन्होंने अपना गीत फिर मेरी याद..सुनाया।