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Kotdwar: पक्षी प्रेमियों के लिए अच्छी खबर, शुरू हुआ तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल, बहुत कुछ होगा खास

Fri, 03 Feb 2023 07:34 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार

सार

बर्ड फेस्टिवल के आयोजन से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर कोटद्वार को नई पहचान मिलेगी। क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
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बर्ड फेस्टिवल का शुभारंभ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोटद्वार जिला प्रशासन की ओर से कोटद्वार में तीन दिवसीय बर्ड फेस्टिवल का आगाज शुक्रवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। इस मौके पर पक्षी प्रेमियों की ओर से पक्षियों की फोटो पेंटिंग लगाई गई। साथ ही पक्षी विशेषज्ञों की अगुवाई में विभिन्न प्रांतों से पहुंचे पक्षी प्रेमियों ने बर्ड वॉचिंग का लुफ्त उठाया। पक्षी प्रेमियों को बर्ड वॉचिंग के साथ डाक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई जाएगी। तिलवाढांग वन विश्राम गृह में बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने किया।

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उन्होंने कहा कि बर्ड फेस्टिवल के आयोजन से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर कोटद्वार को नई पहचान मिलेगी। क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। कहा कि उत्तराखंड में पक्षियों की 600 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं। जिसमें कोटद्वार और आसपास के जंगलों में 450 से अधिक पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं। इस मौके पर विस अध्यक्ष ने पहाड़ी उत्पादों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। बर्ड फेस्टिवल में प्रकृति प्रेमियों के अलावा छात्र-छात्राओं व स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।
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इस मौके पर जिला अधिकारी पौड़ी डॉ. आशीष कुमार चौहान, डीएफओ दिनकर तिवारी, भाजपा नेता उमेश त्रिपाठी, कृषि उत्पादन मंडी समिति के अध्यक्ष सुमन कोटनाला, भाजपा जिलाध्यक्ष बीरेंद्र रावत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पंत, प्राचार्य प्रो. जानकी पंवार, बीईओ अयाजुद्दीन, एसडीएम प्रमोद कुमार, सीओ जीएस कोहली, सीओ विभव सैनी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल ओम प्रकाश फरस्वाण (से.नि.), कर्नल अजय कुंवर सिंह (सेनि.), पूर्व पालिकाध्यक्ष रश्मि सिंह, पार्षद मनीष भट्ट आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पदमेश बुड़ाकोटी और डॉ. तनु मित्तल ने संयुक्त रूप से किया।

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पक्षी विशेषज्ञों ने पक्षियों के बारे में दी रोचक जानकारियां, अनुभव साझा किए
कार्यक्रम के दौरान पक्षी विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों और स्कूली बच्चों को पक्षियों के संबंध में कई रोचक जानकारियां दी। सेवानिवृत्त डीएफओ धीरजधर बछवाण ने बुलबुल की रेड र्स्किट, येलो र्स्किट आदि प्रजातियों और कटफोड़ा पक्षी के बारे में जानकारी दी। देवेंद्र काला ने बताया कि वन अधिकारी राजीव भरतरी ने वर्ष 2011 में प्रदेश में बर्ड वाचिंग की शुरुआत की थी। पहले गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में वर्ष में बर्ड वॉचिंग के 24 कार्यक्रम आयोजित होते थे।

बताया कि हिमालयन फीजेंट (पर्वतीय बटेर) 1876 के बाद नहीं देखी गई। विभिन्न संस्थाओं ने हिमालयन फीजेंट पक्षी की खोज करने वाले को लाखों के इनाम की घोषणा की है। पक्षी प्रेमी मोहित कंडवाल ने कहा कि पक्षियों को देखना भी एक प्रकार का ध्यान (मेडिटेशन) है। मानसिक बीमारियों से बचाव के लिए नेचर वॉक की जरूरत है। लेकिन वर्तमान पीढ़ी ने नेचर के बजाए मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी से नजदीकी बना ली है। आर्य समाज के प्रधान आनंद प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि जब आर्य समाज मंदिर में हवन होता है तो आसपास कईं पक्षी चहचहाने लगते हैं।
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