अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु का पूजन कर अक्षय फल प्राप्त किया जा सकता है। 21 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। इस दिन बहिखाता पूजन और सोने-चांदी की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार मध्याह्न 2.48 से अपराह्न 4.18 बजे तक का समय बहिखाता पूजन और खरीदारी के लिए शुभ है।
भविष्य पुराण के अनुसार भगवान के अंशावतार श्री परशुराम जी का जन्म बैसाख शुक्ल तृतीया तिथि के प्रथम प्रहर (प्रदोष काल) में हुआ था। सोमवार (20 अप्रैल) को शाम 6.43 बजे यानी सूर्यास्त के बाद परशुराम जी का जन्मोत्सव मनाना शुभ होगा। रात्रि का प्रथम प्रहर शाम 6.43 से 9.28 बजे रात तक रहेगा।
अक्षय तृतीया मंगलवार (21 अप्रैल) को है। यह स्वयं सिद्धि मुहूर्त तिथि है, इस दिन किए गए शुभ कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है। इस दिन तृतीया तिथि, मंगलवार, रोहिणी नक्षत्र, सौभाग्य योग और गर करण रहेगा। रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत मंगलवार को पूर्वाह्न 11.45 बजे होगी। जो कि बुधवार को पूर्वाह्न 11.05 बजे तक रहेगा।
तृतीया तिथि 20 अप्रैल को शाम 6.50 से शुरू होकर 21 अप्रैल को शाम 6.54 बजे तक रहेगी। तृतीया तिथि के दिन रोहिणी नक्षत्र का होना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कर्म का कभी नाश नहीं होता है।